सात साल की हुजैफा ने रखा पहला रोजा

सात साल की हुजैफा ने रखा पहला रोजा

सात साल की हुजैफा ने रखा पहला रोजा 

रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

सोजत। माहे रमजान अल्लाह के करीब होने का सबसे उत्तम समय है जिसमें हर नेक अमल पर खास रहमत बरस्ती है। इसी रहमतों बरकतों को हासिल करने के लिए हर मौमीन रोज़ा रखते हैं और इबादत में मसगुल रहते। बच्चे इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसी सब बातों पर अमल करते हुए अब्दुल मुनीर साइना बानों की बिटिया सात साल की हुजैफा ने अपना पहला रोजा रखा और सारे दिन अल्लाह की इबादत में मसगुल रही। रात को तराबीह का एतमाम किया सुबह जल्दी उठकर सहरी की और पांच वक्त नमाज़ अदा कर दिन भर इबादत की शाम को इफ्तार के वक्त रोज खोलकर देश में अमन चैन और खुशहाली की दुआएं की। दादा हाजी अब्दुल सलीम सिलावट ने मोहल्ले भर में मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया।