तीन साल की लड़ाई के बाद राजस्थान टेबल टेनिस को मिली मान्यता

तीन साल की लड़ाई के बाद राजस्थान टेबल टेनिस को मिली मान्यता

तीन साल की लड़ाई के बाद राजस्थान टेबल टेनिस को मिली बड़ी जीत            भारतीय महासंघ से मिली मान्यता- खिलाडियों के लिये              अब उपलब्ध होंगे कई अवसर और सरकारी नौकरियों का रास्ता भी होगा साफ

जोधपुर फरवरी। राजस्थान टेबल टेनिस एसोसिएशन को आखिरकार तीन वर्षों की लंबी लड़ाई के बाद भारतीय टेबल टेनिस महासंघ से मान्यता मिल गई है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को लेकर जोधपुर में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में राजस्थान टेबल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकुल गुप्ता सचिव संजय गहलोत तथा तकनीकी कमेटी के सदस्य अनिल दुबे ने संयुक्त रूप से मीडिया को जानकारी दी।

अध्यक्ष मुकुल गुप्ता ने बताया कि 28 जनवरी 2026 को भारतीय टेबल टेनिस महासंघ की वार्षिक आम बैठक में राजस्थान टेबल टेनिस एसोसिएशन को विधिवत मान्यता दी गई। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ संस्था के लिए नहीं, बल्कि राजस्थान के हर खिलाड़ी के भविष्य के लिए बेहद अहम है।

अब खिलाड़ियों को मिलेंगे उनके हक और नए अवसर — मुकुल गुप्ता

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुकुल गुप्ता ने विशेष रूप से कहा कि मान्यता मिलने के बाद अब खिलाड़ियों को फिर से उनके अधिकार मिलेंगे। उन्होंने बताया कि बीते तीन वर्षों से खिलाड़ी स्कूल और कॉलेज में प्रवेश सरकारी नौकरियों और खेल पुरस्कारों से वंचित थे। उन्होंने कहा, “अब हमारे खिलाड़ियों के लिए रास्ते खुल गए हैं। उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने का मौका मिलेगा, सरकारी पुरस्कार और अनुदान मिलेंगे और नौकरी व शिक्षा से जुड़े सभी अवसर फिर से उपलब्ध होंगे। यह जीत किसी एक व्यक्ति संस्था की नहीं बल्कि हर खिलाड़ी की है।”

1956 से खेल सेवा में जुटी है एसोसिएशन

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सचिव संजय गहलोत ने बताया कि राजस्थान टेबल टेनिस एसोसिएशन वर्ष 1956 से लगातार प्रदेश में टेबल टेनिस को आगे बढ़ा रही है। जयपुर में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन किया गया है। अजमेर की अकादमी से निकले कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं।

उन्होंने बताया कि राजस्थान से 25 अंतरराष्ट्रीय अंपायर, दो अंतरराष्ट्रीय निर्णायक और अनेक तकनीकी अधिकारी तैयार हुए हैं, जो संस्था की बडी उपलिब्ध है।

समानांतर संगठन की साजिश हुई नाकाम

तकनीकी कमेटी के सदस्य अनिल दुबे ने कहा कि वर्ष 2022 में निजी स्वार्थ के चलते एक समानांतर संगठन खड़ा किया गया जिससे खिलाड़ियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बिना चुनाव और नियमों के चलाए गए इस संगठन के कारण प्रवेश अनुदान और रोजगार के अवसर बंद हो गए। उन्होंने बताया कि संस्था ने न्यायालय और थाने तक लड़ाई लड़ी। भारतीय टेबल टेनिस महासंघ की जांच समिति ने भी राजस्थान टेबल टेनिस एसोसिएशन के पक्ष में फैसला दिया।

मान्यता से खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि महासंघ अध्यक्ष मेघना अहलावत के हस्तक्षेप के बाद गतिरोध समाप्त हुआ। अब मान्यता मिलने के बाद राजस्थान के खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित हो गया है। पदाधिकारियों ने दोहराया कि संस्था आगे भी खिलाड़ियों के सम्मान और अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी रहेगी।