राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

राज-सीईएस (राजसेस) महावि‌द्यालयों में संविदा नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पुनर्सरचना की माँग 

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जोधपुर /राजस्थान (उच्च शिक्षा) की महावि‌द्यालय इकाई राजकीय कन्या महाविद्यालय मगरा पूँजला द्वारा आज राज-सीईएस (राजसेस) महावि‌द्यालयों की वर्तमान संकल्पना एवं संचालन व्यवस्था के विरोध में शांतिपूर्ण एवं मर्यादित विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्राध्यापकों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर काली पट्टी बांधकर तथा मांगों से संबंधित प्ले-काईस लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

महासंघ का स्पष्ट मत है कि राज-सीईएस योजना के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों का वर्तमान स्वरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के विपरीत है। इन महावि‌द्यालयों में स्थायी अकादमिक ढांचे का अभाव अपर्याप्त अधोसंरचना एवं संसाधन शोध एवं नवाचार की संभावनाओं का न होना तथा संविदा एवं अस्थायी नियुक्तियों पर आधारित अध्यापन व्यवस्था राज्य की उच्च शिक्षा को गुणवत्ता, बहुविषयकता एवं अकादमिक निरंतरता से दूर ले जा रही है।

महासंघ ने अवगत कराया कि सत्र 2020-21 से 2022-23 के मध्य राज-सीईएस योजना के अंतर्गत 303 नवीन महाविद्यालय खोले गए तथा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सत्र 2023-24 एवं 2024-25 में 71 अतिरिक्त राज-सीईएस महावि‌द्यालय खोले जा चुके हैं जिससे इनकी कुल संख्या 374 हो गई है। इनमें से लगभग 260 राज-सीईएस महावि‌द्यालयों में आज भी एक भी स्थायी संकाय सदस्य कार्यरत नहीं है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

प्रदर्शन के उपरांत संगठन के प्रतिनिधिमंडल द्वारा उपखंड अधिकारी/जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री म राज्यपाल एवं प्रधानमंत्री के नाम पृथक-पृथक ज्ञापन प्रस्तुत कर शीघ्र समाधान की माँग की गई। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विधानसभा चुनाव-2023 के पश्चात गठित राज्य सरकार द्वारा राज-सीईएस महावि‌द्यालयों एवं विषयों के संचालन के संबंध में गठित सोडाणी समिति की सिफारिशें अब तक न तो सार्वजनिक की गई हैं और न ही लागू की गई हैं।

महासंघ ने यह भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई कि भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 के माध्यम से राज-सीईएस नियम-2023 में परिवर्तन कर पाँच वर्षों के लिए 28 हजार 500 रुपये के नियत वेतन पर संविदा टीचिंग एसोसिएट एवं अशैक्षणिक पदों की चयन प्रक्रिया प्रारंभ करने का प्रयास किया जा रहा है जिसके लिए अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को अभ्यर्थना भेजी जा चुकी है। महासंघ के अनुसार यह व्यवस्था अस्थायी असुरक्षित एवं नीति-विरोधी है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के सर्वथा विपरीत है।

महासंघ ने राज्य सरकार से माँग की कि राज-सीईएस महावि‌द्यालयों के संबंध में गठित सोडाणी समिति की सिफारिशों को अविलंब लागू किया जाए, राज्य में संचालित सभी राज-सीईएस महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों के रूप में संचालित करने के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएँ तथा संविदा नियुक्तियों की प्रस्तावित चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। महासंघ ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन को लोकतांत्रिक एवं आंदोलनात्मक मार्ग अपनाने के लिए विवश होना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

  • आज के इस विरोध प्रदर्शन में संगठन के जोधपुर प्रांत संगठन मंत्री प्रो हरिसिंह राजपुरोहित विभाग सहसंयोजक प्रो पुष्पा विश्नोई प्रो ईश्वर चंद्र शर्मा जिला उपाध्यक्ष डॉ दिलीप सिंह जिला प्रचार प्रमुख प्रो धीरेन पँवार महावि‌द्यालय इकाई सचिव डॉ अर्चना गौड़ तथा संगठन के अन्य के पदाधिकारी एवं प्राध्यापक साथी उपस्थित रहे।