यूनानी दिवस: हकीम अजमल खान की विरासत, यूनानी चिकित्सा की समकालीन प्रासंगिकता और इलाज के तरीके : डॉ. मोहम्मद मोइनुद्दीन

यूनानी दिवस: हकीम अजमल खान की विरासत, यूनानी चिकित्सा की समकालीन प्रासंगिकता और इलाज के तरीके : डॉ. मोहम्मद मोइनुद्दीन

यूनानी दिवस: हकीम अजमल खान की विरासत, यूनानी चिकित्सा की समकालीन प्रासंगिकता और इलाज के तरीके : डॉ. मोहम्मद मोइनुद्दीन

**यूनानी दिवस** हर वर्ष **11 फरवरी** को मनाया जाता है। यह दिन महान यूनानी चिकित्सक, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी **हकीम अजमल खान** की जयंती के उपलक्ष्य में समर्पित है। उनका जन्म 11 फरवरी 1868 को दिल्ली में हुआ था। वे यूनानी चिकित्सा के पुनरुत्थान के प्रमुख स्तंभ थे। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त इस दिन को 2017 से वैश्विक स्तर पर मनाया जा रहा है।

2026 में यूनानी दिवस 11 फरवरी को मनाया जा रहा है। इसके साथ ही 14-15 फरवरी को मुंबई में राष्ट्रीय सम्मेलन "Innovation and Evidence in Unani Practice" आयोजित हो रहा है। यह CCRUM (Central Council for Research in Unani Medicine) द्वारा किया जा रहा है, जो यूनानी में नवाचार और प्रमाण-आधारित अभ्यास पर फोकस करता है।

**यूनानी चिकित्सा का इतिहास और सिद्धांत**

यूनानी चिकित्सा दुनिया की प्राचीनतम प्रणालियों में से एक है। इसका आधार बुकरात **हिप्पोक्रेट्स** (Father of Medicine) और जालीनुस **गैलेन** पर है। बाद में **इब्न-ए-सीना** (Avicenna) ने इसे विकसित किया। 

मूल सिद्धांत **तवाज़ुन-ए-अखलात** (चार ह्यूमर्स का संतुलन) पर है: दम (Blood), बलगम (Phlegm), सफरा (Yellow bile), सौदा (Black bile)। स्वास्थ्य इनके संतुलन पर निर्भर है। इलाज के चार मुख्य तरीके हैं:

1. इलाज-बिल-गिज़ा (Dietotherapy)

2. इलाज-बिल-दवा (Pharmacotherapy)

3. इलाज-बिल-तदबीर (Regimental Therapy)

4. इलाज-बिल-यद (Surgery)

**यूनानी में दवाएं (Pharmacotherapy)**

यूनानी दवाएं मुख्यतः प्राकृतिक स्रोतों से बनती हैं – जड़ी-बूटियां, खनिज और पशु उत्पाद। ये सिंगल ड्रग्स या कंपाउंड फॉर्मूलेशन (Majun, Khamira, Qurs, Safoof, Sharbat आदि) के रूप में इस्तेमाल होती हैं। ये कम साइड इफेक्ट्स वाली, सस्ती और होलिस्टिक हैं।

कुछ लोकप्रिय और प्रभावी यूनानी दवाओं के उदाहरण:

- **डायबिटीज (Ziabetus Shakri)** में: Qurs Ziabetus, Qurs Tabasheer, Safoof Ziabetus, Garlitab, Safuf Dhayabitus Dulabi। इनमें जामुन (Syzygium cumini), करेला (Momordica charantia), मेथी (Trigonella foenum-graecum), नीम, दालचीनी आदि शामिल होते हैं। ये ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं और कॉम्प्लिकेशन्स रोकती हैं।

- **जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस (Waja al-Mafasil)** में: Majun Falasfa (हड्डियों और नसों को मजबूत करता है, जोड़ों का दर्द और गठिया में फायदेमंद), Majun Asgand (Ashwagandha-based, नर्वस सिस्टम और जोड़ों के लिए)।

- **त्वचा रोग (Eczema, Psoriasis, Vitiligo)** में: Roghan-e-Babchi, Safoof-e-Mohazzil, या विशेष लेप।

- **पाचन समस्याएं (Indigestion, Constipation)** में: Jawarish Jalinus, Habb-e-Muqil, Safoof-e-Mohazzil (फाइबर और डाइजेस्टिव हर्ब्स से युक्त)।

- **मानसिक स्वास्थ्य और हृदय** में: Khamira Gaozaban Ambari (दिमागी ताकत बढ़ाता है, तनाव कम करता है), Khamira Abresham Hakim Arshad Wala (हृदय और ब्रेन के लिए)। नोट- बग़ैर चिकित्सकीय परामर्श से इलाज ना लेवे । 

ये दवाएं CCRUM द्वारा स्टैंडर्डाइज्ड और रिसर्च-बेस्ड हैं। कई क्लिनिकल ट्रायल्स में इनकी प्रभावशीलता साबित हुई है।

**रेजिमेंटल थेरेपी (Ilaj bil Tadbeer)**

यह यूनानी का अनोखा और ड्रग-लेस हिस्सा है। इसमें शरीर से मोरबिड मैटर (खराब ह्यूमर्स) को निकालकर या बैलेंस करके इलाज किया जाता है। यह प्रिवेंटिव और क्यूरेटिव दोनों है। लगभग 30+ तरीके क्लासिकल किताबों में वर्णित हैं।

कुछ प्रमुख रेजिमेंटल थेरेपी:

- **हिजामा (Hijama / Cupping)**: सबसे लोकप्रिय। वेट कपिंग (खून निकालकर) या ड्राई कपिंग। दर्द, इंफ्लेमेशन, ब्लड सर्कुलेशन सुधारने, डिटॉक्स और क्रॉनिक डिजीज (जैसे बैक पेन, आर्थराइटिस, माइग्रेन) में बहुत फायदेमंद। आजकल WHO द्वारा भी मान्यता प्राप्त।

- **दलक (Dalak / Massage)**: तेल से मालिश। मसल्स रिलैक्सेशन, ब्लड फ्लो बढ़ाने और स्ट्रेस कम करने के लिए।

- **फसद (Fasd / Venesection)**: खास नस से खून निकालना। हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन या खराब खून के मामलों में।

- **तलेक-ए-अलक (Leech Therapy / Irsal-e-Alaq)**: जोंक से खून निकालना। स्किन डिसऑर्डर, वैरिकोज वेंस, जोड़ों के दर्द में उपयोगी।

- **तरीक (Ta'areeq / Sweating)**: स्टीम बाथ या गरम हमाम से पसीना निकालना। डिटॉक्स और रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स में।

- **रियाजत (Riyazat / Exercise)**: योग, वॉकिंग या स्पेसिफिक एक्सरसाइज। फिटनेस और हेल्थ प्रमोशन के लिए।

- **हुक्ना (Enema)**, **इशाल (Purgation)**, **कई (Emesis)** आदि – बॉडी क्लीनजिंग के लिए।

ये थेरेपीज़ आज भी यूनानी अस्पतालों और क्लीनिक्स में इस्तेमाल होती हैं। इन्हें आधुनिक लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स में बहुत प्रभावी पाया गया है।

**भारत में यूनानी चिकित्सा की स्थिति**

भारत यूनानी का ग्लोबल सेंटर है। CCRUM रिसर्च, स्टैंडर्डाइजेशन और क्लिनिकल ट्रायल्स कर रहा है। 50+ यूनानी मेडिकल कॉलेज, BUMS/MD कोर्स। क्रॉनिक डिजीज जैसे डायबिटीज, आर्थराइटिस, स्किन प्रॉब्लम्स में 50-60% लोग यूनानी चुनते हैं।

**हकीम अजमल खान का योगदान**

उन्होंने तिब्बिया कॉलेज स्थापित किया, रिसर्च की वकालत की। उनकी विरासत आज हमें प्रेरित करती है।

**चुनौतियां और भविष्य**

जागरूकता, फंडिंग और इंटीग्रेशन की जरूरत है। भविष्य में यूनानी होलिस्टिक हेल्थ में लीडर बन सकती है।

**निष्कर्ष**

यूनानी दिवस हकीम अजमल खान की याद दिलाता है। दवाओं और रेजिमेंटल थेरेपी से यह प्रणाली आज भी लाखों को स्वास्थ्य दे रही है। आइए इसे अपनाएं, जागरूकता फैलाएं और आधुनिक विज्ञान से जोड़ें।

**यूनानी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!**

(लेखक: डॉ. मोहम्मद मोइनुद्दीन, यूनानी चिकित्सक)