सोने की चमक से समझिए मोदी का कमाल!

सोने की चमक से समझिए मोदी का कमाल!

सोने की चमक से समझिए मोदी का कमाल!

- निरंजन परिहार 

नरेंद्र मोदी को समझिए। हम सभी को उनको समझना जरूरी है। लोग कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को समझना मुश्किल ही नहीं, असंभव है। लेकिन आखिर मोदीजी को देश के बहुत सारे लोग समझते तो है ही। गृह मंत्री अमित शाह जैसे  और भी कई लोग समझते हैं। अपना मानना है कि असंभव भी जब संभव है, तो मोदीजी को भी समझना संभव है। यह सब इसलिए  क्योंकि जो उनको समझा, वह तो सम्हल गया, और जो ना समझा वो हिल गया। गोल्ड का ही मामला ले लीजिए। जो उनकी गोल्ड ना खरीदने की अपील के स्वार्थ, भावार्थ और निहितार्थ को समझ गया, वह तो कमा गया। लेकिन जो नहीं समझा, वह पिछड़ गया। 

गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से गोल्ड अचानक 10 प्रतिशत महंगा हो गया है। जिसने खरीद लिया, वो काम गया, और बाकी लोग रह गए। आने वाले दिनों में गोल्ड के मामले में मोदीजी कुछ और भी बड़े निर्णय ले सकते हैं। गोल्ड ही नहीं, देश की अर्थव्यवस्था, व्यापारिक विकास और राजनीतिक मामलों में भी उनकी समझ की थाह लेना जरूरी है। क्योंकि दूरदर्शिता के साथ तेजी से फैसले लेने के मामले में आज की तारीख में प्रधानमंत्री मोदी से ज्यादा तेजतर्रार और त्वरित तात्कालिकता किसी और में नहीं है। 

देश जान रहा है कि आज तक जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं, उनमें प्रधानमंत्री मोदी की सोच और काम करने का तरीका सबसे अलग है। वे व्यवहारिक तरीके से सोचते हैं, आम जनता की भलाई के लिए आगे बढ़ते हैं और राजनीतिक फायदे को केंद्र में रखकर देश को नुकसान न होने देने की चिंता करते हैं। गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी में ताजा 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी, पीएम मोदी की उसी निर्णय क्षमता का कमाल है। एक दिन पहले देश से गोल्ड ना खरीदने की अपील की थी और फिर भी लगा कि हम हिंदुस्तानी गोल्ड खरीदना नहीं छोड़ेंगे, तो इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर मामला संतुलित कर दिया। मतलब,  24 जुलाई, 2024 को गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 15 प्रतिशत से घटाकर जितनी कम की थी, उसी 15 फीसदी के लेवल पर फिर से ले आए। 

कायदे से देखा जाए, तो सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोत्तरी नहीं की है बल्कि फिर से 15 प्रतिशत के पुराने लेवल पर ले आई है। लेकिन यह निर्णय जरूरी था, ताकि देश को आर्थिक नुकसान नहीं हो, विदेशी मुद्रा बची रहे और भारत सर्वोपरि बना रहे। इसीलिए अपना मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के निहितार्थ को जिन लोगों ने गहराई के साथ समझ लिया था, उन्होंने तो पहले ही सोना खरीद लिया और कमा गए। लेकिन जिन्होंने नहीं खरीदा, वो अब भी महंगे भाव में भी चाहे तो खरीद लें। क्योंकि आने वाले दिनों में आर्थिक संकट वैश्विक स्तर पर गहराने वाला है, ना ना प्रकार की कई और मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। वैसे, मुश्किल में सोना ही सरकारों का भी सबसे बड़ा साथी बनता है, तो आपका और हमारा भी साथ तो निभाएगा ही।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)