भारत की दुर्गति का कारण है गौ माता की दुर्गति
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भारत की दुर्गति का कारण है गौमाता की दुर्गति
रिपोर्ट: सुरेन्द्र सिंह, THE BHASWAR TIMES
उत्तराखंड || 30 जुलाई 2026
सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है ,सम्मान से उसे गौमाता कहकर पुकार जाता है। धर्मगुरु और समाजसेवियों और गौ सेवकों एवम गौ भक्तों का मानना है की जिस देश में गाय की दुर्गति होती है,उस देश की दुर्गति निश्चित है एक दिन । समय समय पर प्रकृति हमें भयंकर चेतावनी भी देती है ,उदाहरण के लिए उत्तराखंड में आई भयकर आपदा 6 अगस्त 2025 को भी इससे जोड़कर संत महापुरुष देखते हैं।
गौ माता राष्ट्र की प्रगति की रीढ़ है
गाय केवल एक पशु मात्र नहीं है ,यह सनातन की मूल है,कृषि ,स्वास्थ्य एवम सनातन संस्कृति की रीढ़ की हड्डी है गौमाता। आज देश में लाखों लोग गौ सेवा से ,गौ मूत्र की दवाई से गोवर के उपयोग से रोजगार पा रहे हैं ।
कई अरब देशों में सुना है गाय का वध करना बैन है, आज हम अपने देश में देखते हैं तो एक सख्त कानून लाने की अति आवश्यकता है और प्लास्टिक की पन्नियों पर भी बैन लगना चाहिए ,क्योंकि हजारों गाय जो रोडों पर गलियों में घूमती हैं वे प्रति दिन पन्नियों में रखे भोजन को खाने के चक्कर में पन्नियाँ भी खा जाती हैं ,पन्नियाँ पेट में फस जाती हैं और हजारों गायों की मौत उससे भी होती है।
आज हमें जागने की जरूरत है अपनी आवाज को सरकार तक पहुचाने की जरूरत है ।
हमारा निजी प्रयास श्री गाय वाले हनुमान जी के स्थान उत्तराखंड गाँव ताल जिला पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड में कई सालों से श्री हनुमान जी से रोज गाय के जीवन को बचाने के गौ बजरंग बाण जो भारत सरकार से कॉपी राइट कराया हुआ है के माध्यम से श्री हनुमान जी से किया जाता है । इसमें गौ माता की रक्षा के लिए हनुमान जी को जगाया जाता है ,रोज सुवह शाम को किया जाता है। हमें उम्मीद ही नहीं भरोषा है जिस दिन हनुमान जी पुकार सुन लेंगे उस दिन हर प्रकार से गाय माता का जीवन सुरक्षित हो जाएगा ।
इसी आशा और उम्मीद के साथ
जाय श्री राम जी गौमाता