आखिरी कुछ बातें अधूरी रह जाती हैं...
आखिरी
कुछ बातें अधूरी रह जाती हैं...
जैसे स्याही का आखिरी शब्द कागज़ पर न उतर पाए,,,
जैसे साँझ के दामन में सिमटता सूरज अधूरा रह जाए!

कुछ ख्वाहिश अधूरी रह जाती हैं...
जैसे कोई सुर अनकही धुन में खो जाए,,,
जैसे नदी अपने किनारों से मिलने को तरस जाए!
कुछ बातें अधूरी रह जाती हैं...
जैसे किताब का आखिरी पन्ना खो जाए,,,
जैसे चाँद का एक कोना बादल में छुप जाए!
कुछ ख्वाहिशें भी अधूरी रह जाती हैं...
जैसे सपने अधखुले पलकों में ठहर जाएं,,,
जैसे बहार में बिखरती किसी फूल की महक अधूरी रह जाए!
अंजू जांगिड़ राधे