राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता एवं प्रदेश की दूसरी राजभाषा बनाने की पुरजोर मांग
राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता एवं प्रदेश की दूसरी राजभाषा बनाने की पुरजोर मांग
विश्व मातृभाषा दिवस पर मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
सोजत । राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता एवं प्रदेश की दूसरी राजभाषा बनाने बाबत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम उपखंड अधिकारी मासिंगाराम जांगिड़ को विश्व मातृभाषा दिवस पर एक दिवसीय उपवास रखते हुए शबनम साहित्य समिति द्वारा ज्ञापन सौंपा गया।

राज्य स्तरीय उपवास कार्यक्रम के संयोजक अब्दुल समद राही ने बताया कि राजस्थानी युवा लेखक संघ और प्रज्ञालय संस्थान बीकानेर के आह्वान पर साहित्यकार, शिक्षाविद व गणमान्य जन द्वारा राज्य स्तर पर उपवास रखा गया व ज्ञापन सौंपे गए उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत राजस्थानी भाषा को प्रदेश की दूसरी राजभाषा शीघ्र घोषित करने के साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा में राजस्थानी भाषा को माध्यम बनाने की पुरजोर मांग की गई जिससे 12 करोड़ से अधिक राजस्थान के लोगों को उनका वास्तविक हक मिल सके।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र लखावत, कार्यक्रम संयोजक अब्दुल समद राही, कवि नवनीत राय रुचिर, पूर्व सीबीओ बसंतकुमार लखावत, वरिष्ठ कवि एव समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के प्रांतीय अध्यक्ष रामस्वरूप भटनागर, व्यंग्यकार उमाशंकर द्विवेदी, कथाकार डॉ रशीद गौरी, गीतकार पेन्टर दलपत, साहित्यकार हरीशचंद्र व्यास, शारीरिक शिक्षक संघ पाली जिला संरक्षक सत्तुसिंह भाटी, राज पब्लिक स्कूल एम डी किसना राम चौधरी, फौजी अशोक सेन, फौजी चेनाराम, मनोहर पालरिया, चेतन व्यास, राजेन्द्र व्यास आदि कई साहित्यकार और गणमान्य जन उपस्थित थे।