ममता जब सिसकती है दर्द, पीड़ा और खून के आंसू रोती हैं : अब्दुल समद राही 

ममता जब सिसकती है दर्द, पीड़ा और खून के आंसू रोती हैं : अब्दुल समद राही 

पुस्तक समीक्षा-

ममता जब सिसकती है दर्द, पीड़ा और खून के आंसू रोती हैं : अब्दुल समद राही 

     मां का नाम जुबां पर आते ही मन फुदकने लगता है। चेहरा खिल जाता है और आंखें खुशी से चमकने लगती है। मां शब्द ही ऐसा है जिसमें दुनिया समाई हुई है चाहे बच्चा कितना भी बड़ा हो जाए मां का प्यार और देखभाल कभी कम नहीं होती। मां की ममता निस्वार्थ होती है व किसी प्रतिफल के अपने बच्चों की खुशी और भलाई चाहती है। मां की ममता ही बच्चों को सही राह दिखाती है। उसे संस्कार देती हैं और बच्चों का भविष्य संवारती है।

        मगर वही ममता जब सिसकती है दर्द, पीड़ा और खून के आंसू रोती है तो उस दर्द की चीखें भीतर तक गूंजती है। इसी गूंज को जन-जन तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया है जय भगवान सिंगला ने सिसकती ममता काव्य संग्रह की रचना करके। ममता के कई रूप हैं जो लेखक सिंगला ने अपनी कलम के माध्यम से नारी, मां, पिता, बेटी और समाज आधारित रचना गड़कर उजागर करने का सार्थक प्रयास किया है।

      समाज व देश में हो रहे नारी पर जुर्म हर एक कविता में साफ दिखाई देता है। बेटी के पैदा होते ही झाड़ियां में फेंक देने से लेकर शादी के बाद तक के जुर्म को रेखांकित करती कविताएं मन को झकझोर देती है। समाज-देश और हमारे आसपास घटित होने वाली उन तमाम घटनाओं को लेखक ने बखूबी वर्णन किया है और आगाह भी किया है कि अब नारी अबला नहीं रही है वो हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है।

      आज की नारी पहले से कहीं ज्यादा सशक्त और आत्मनिर्भर है। शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, खेल और व्यवसाय जैसे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है और हर मोर्चे पर अपनी पहचान बना रही है मगर आज भी एक तबका ऐसा है जहां नारी को हीन दृष्टि से देखा जाता है। उस पर उंगली उठाई जाती है उसे सताया जाता है। दहेज का दानव आज भी मुंह फाड़े खड़ा है। दहेज प्रथा समाज के लिए अभिशाप बनी हुई है।

      सिसकती ममता के माध्यम से लेखक जय भगवान सिंगला ने हमें एक गहरा संदेश दिया है जिस पर हमें चिंतन-मनन करने की आवश्यकता है। लेखक के प्रयास की सराहना करते हुए हम उन्हें बधाई देते है। यह पुस्तक समाज को एक नई राह दिखाएंगी। पुस्तक की भाषा सहज व सरल है। छपाई सुंदर व कविताओं के साथ दिए गए चित्र कविताओं को पढ़ने के लिए आकर्षित करते है। सिंगला जी को पुनः बधाई देते हुए उनके दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते है। आप इसी तरह समाज और देश की सेवा करते रहें।

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पुस्तक : सिसकती ममता 

लेखक : जय भगवान सिंगला

समीक्षक : अब्दुल समद राही 

प्रकाशक : स्वप्रकाशन 

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