परशुराम महादेव के दर्शन करने वाला ही खोलता है बद्रीनाथ के पट
महाशिवरात्रि पर विशेष आलेख -सुरेश रावल परशुराम महादेव के दर्शन करने वाला ही खोलता है बद्रीनाथ के पट सादड़ी/ परशुराम महादेव के दर्शन करने वाला ही खोलता है बद्रीनाथ के पट खोलता हैं पहले राम थे जब परशु धारण किया तो परशुराम कहलाए। बद्रीनाथ से 7227 नीचे बिराजे है भगवान विष्णु के छठे अवतार देवाधिदेव परशुराम महादेव ऐसी मान्यता हैं कि भगवान परशुराम के जन्म दिन अक्षय तिथियां पर बद्रीनाथ के पट खुलते हैं ऐसी मान्यता है कि परशुराम महादेव के दर्शन करने वाले श्रद्धालु ही पट खोलते हैं यह पहुंचने वाले लाखों भाग्यशाली श्रद्धालु पटधारी बन जाते हैं। भगवान बद्रीनाथ 10827 वहीं परशुराम महादेव 3600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
पहले इनका नाम राम था परशु धारण करते ही परशुराम कहलाए व महादेव की कठोर तपस्या के बाद परशुराम महादेव परशुरामजी का नाम पहले राम था भगवान गणेश की तपस्या के बाद इन्हें परशु मिला ज्योंहि परशु धारण किया तो परशुराम कहलाए व पाली व राजसमंद जिले की सीमा पर विश्व की अति प्राचीन पर्वत श्रृंखला अरावली के शीर्ष पर अपने परशु से पहाड़ को चिर कर गुफा बनाई व उसमें भगवान महादेव की कठोर तपस्या की महादेव प्रसन्न हो गए भगवान के पहले भक्त का नाम जुड़ गया इसी लिए इस तीर्थ का नाम परशुराम महादेव हुआ। यह तीर्थ त्रेता युग यानी भगवान श्री राम के जन्म के पहले का है।
स्वयंभू प्राकृतिक शिवलिंग है जिसपर भगवान महादेव का पूरा परिवार बिराजमान है= चिरंजीव भगवान परशुरामजी ने अपने परशु से पहाड़ को चिर कर गुफा बनाई इस गुफा में स्वयंभू प्राकृतिक शिव लिंग है जिस पर भगवान शिव का पूरा परिवार बिराजमान है शिव लिंग के दाई तरफ भगवान गणेश,बाई तरफ कार्तिक स्वामी व महादेव व माता पार्वतीजी की अर्द्धनारेश्वर के रूप में बिराजमान है शिव लिंग के ऊपर गौमुख है जिसमें से 24 घंटे लगातार गंगा जल गिरता है जो भगवान परशुराम महादेव का प्राकृतिक रूप से जलाभिषेक होता। परशुराम महादेव मंदिर में प्रवेश करते ही कामधेनु आकार की गुफा में कामधेनु गाय के स्तन है श्रद्धालु इसके निचे खड़े रहते हैं व ज्यों ही गो स्तन से गंगाजल रूपी बूंद श्रद्धालु के माथे पर गिरजाती हैं तो उस भक्त की मनोकामना शत प्रतिशत पूरी होती है शिव लिंग पर देश में बहनेवाली पवित्र नदियों के नाम से कुंड बने हे जिसमें हमेशा जल भरा रहता हैं।
एक मात्र शिष्य परशुराम ने अपने गुरु महादेव को गुरुदक्षिणा दी थीहालांकि महादेव के दो परम शिष्य थे एक रावण व दूसरे चिरंजीव भगवान परशुराम एकबार शास्त्रा बाहु अर्जुन रावण का अपहरण कर अपने निवास पर बंधक बनाकर उल्टा टांग दिया यह बात जब महादेव को मालूम पड़ी तो वो बहुत दुखी हुए उस दौरान भगवान परशुराम गुफा में कठोर तप कर रहे थे महादेव ने कहा बेटे आपकी तपस्या पूर्ण हो गई अब मुझे गुरु दक्षिणा दो तो भगवान परशुराम ने कहा कि महादेव में इस लायक हो गया तो महादेव ने कहा हा भगवान परशुराम जी ने कहा गुरुदेव मेरे लिए क्या आदेश है तो महादेव ने कहा कि आपके गुरु भाई को शास्रा अर्जुन ने बंधक बनाकर रखा हे उसकी कैद से छुड़वाकर लाओ मेरे सामने पेश करो यही मेरी गुरु दक्षिणा है।इस प्रकार भगवान परशुराम ने शास्त्रा बाहु के कब्जे से रावण को छुड़वाकर महादेव को गुरु दक्षिणा अर्पित की।
सावन के माह में पूरा शिव परिवार इस गुफा में अदृश्य रूप से मौजूद रहता है व यहां दर्शन करने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं बारह माह में भगवान महादेव का प्रिय माह सावन मास है। सावन मास में जो भी भक्त परशुराम महादेव के दर्शन करता है उसके समस्त पापो का नाश होता है व उनकी मनोकामना पूरी होती है। त्रेता युग से पहले भगवान परशुराम ने यहां महादेव की कठोर तपस्या की तो महादेव टेंशन में आ गए। टेंशन का कारण भस्मासुर ने भी कठोर तो कर महादेव से वरदान कड़ा मांग लिया जिस पर घुमाएगा वो भस्म हो जाएगा भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर महादेव को राहत दिलाई। महादेव ने देखा कि यदि परशुराम ने वरदान में तीनों लोक का राज मांग लिया तो मेरा परिवार कहा रहेगा इस लिए परशुराम को वरदान देने महादेव पूरे परिवार सहित इसी गुफा में अवतरित हुए महादेव ने देखा कि मेरे ऊपर नहीं तो परशुराम भगवान गणेश व कार्तिक के सामने देख कर उल्टा वरदान नहीं मांगेगे भगवान परशुराम ने महादेव से पहला वरदान यह मांगा कि गोमुख से गंगा प्रकट करो जिससे इस स्वयंभू प्राकृतिक शिवलिंग का लगातार जलाभिषेक होता रहे महादेव ने कमंडल से जल गौमुख पर जल छिड़का व गंगा प्रकट की दूसरा वरदान यह मांगा कि सावन मास में आपका पूरा परिवार इस गुफा में अदृश्य रूप से मौजूद रहेगा व जो भी भक्त मेरे दर्शन करेगा उनके समस्त पापो का नाश करेंगे साथ ही उनकी मनोकामना भी आप पूरी करेंगे इस लिए सावन में महादेव की एक झलक पाने के लिए भक्त दिन रात घंटों तक कतारबद्ध खड़े रहकर भी भगवान परशुराम महादेव के दर्शन करते है।
भगवान परशुराम को अजेय धनुष व दिव्य परशु इसी गुफा में मिला भगवान परशुराम का अवतार जिस कम के लिए हुआ था उसको मृत रूप देने के लिए भगवान परशुराम ने पहले भगवान गणेश की कठोर तपस्या कर परशु प्राप्त किया व महादेव की तपस्या से अजेय धनुष इसी गुफा में प्राप्त कर शास्त्रबाहु जैसे अत्याचारी क्षत्रियों को 24बार धारावीन किया व महादेव का अजेय धनुष राजा जनक को सुपुर्द किया।
==मातृकुंडिया,वीरों का मठ व सालेश्वर महादेव व पावेश्वर महादेव ऋषिकेश्वर महादेव भगवान परशुरामजी के संबंधित स्थान है नाडोल में स्थित ऋषिकेश्वर महादेव जो भगवान परशुरामजी के दादा ऋचिक ऋषि का स्थान है शालेश्वर व पावेश्वर महादेव इनके पिताश्री जमदग्नि ऋषि की तपोस्थली है, मातृकुंडिया भीलवाड़ा व चितौड़ की सीमा पर हे जहां भगवान परशुराम को मातृहत्या के पाप से मुक्ति मिली थी वहीं वीरों का मठ जहां भगवान परशुरामजी ने महाभारत के तीनों योद्धा अंगराज कर्ण,गुरु द्रोण व भीष्म पितामह को शिक्षा दी थी ये तीनों परशुरामजी के शिष्य थे। वीरों के मठ के मुख्य महंत 1008 श्री रविंद्रपुरीजी है जो निर्वाणी अखाड़ा के अखिल भारतीय अध्यक्ष है। परशुराम महादेव के भक्त व सुरेश रावल ने बताया कि सरकारी उपेक्षा का शिकार परशुराम महादेव तीर्थ
वन विभाग व सार्वजनिक निर्माण विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतते है तीर्थ यात्री विश्व की अति प्राचीन अरावली पर्वत श्रृंखलाओं की हरी भारी वादियों के मध्य पाली व राजसमंद जिले की सीमा पर स्थित देवाधि देव परशुराम महादेव का तीर्थ सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। महादेव का दर्शन को प्रति वर्ष यहां 35 लाख श्रद्धालु महादेव के दर्शन को आते हैं यहां का सड़क मार्ग जानलेवा है सादड़ी से परशुराम महादेव 12 किलोमीटर का सड़क मार्ग अब पुरातत्व विभाग की सामग्री बना है इस मार्ग पर सड़क तलाशनी पड़ेगी। यहां सार्वजनिक निर्माण विभाग काम करना ही नहीं चाहता है वहीं वन विभाग काम में रोड अटकाता है ऐसे में श्रद्धालुओं की सामंत आती है। यह पुराना पुल टूट गया उसकी । 15 फरवरी को महाशिवरात्रि हैं भगवान महादेव ही यह पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा करेंगे। पाली जिला प्रशासन ,वन विभाग सार्वजनिक निर्माण विभाग चाहता हैं यहां बड़ा हादसा हो व बड़ी तादाद में भगवान परशुराम महादेव के श्रद्धालुओं के साथ यह अनहोनी हो लेकिन भगवान भोले की कृपा श्रद्धालुओं के साथ है।