विधायक राजस्थानी के प्रति रूचि दिखाएं - कविया एवं पहाड़िया
विधायक राजस्थानी के प्रति रूचि दिखाएं - कविया एवं पहाड़िया
रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
डेह/नागौर - अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के संस्थापक लक्ष्मण दान कविया एवं संभागीय महामंत्री पवन पहाड़िया ने संयुक्त रूप से ज्ञापन वाट्सअप एवं डाक के जरिये 100 विधायकों को प्रेषित कर विधानसभा के चालू बजट सत्र में राजस्थानी भाषा को कानूनी मान्यता दिलाने की मांग पुरजोर उठाने की मांग दोहराई है। संयुक्त रूप से प्रेषित ज्ञापनों में लिखा गया है कि राजस्थानी भाषा प्रदेश की प्रतीक एवं विश्व के 16 करोड़ नागरिकों की मातृभाषा है। इसका समृद्ध साहित्य भंडार है जो विश्व की तेरहवीं एवं देश की तीसरी भाषा होने का जज्बा रखती है। राजस्थानी का विशाल शब्दकोश है। इसकी कहावतें, लोकगाथाएं, लोककथाएं, लोकगीत अपनी विशिष्ट पहचान बनाये हुए हैं। रियासत काल में की रियासतों के कामकाज की भाषा भी राजस्थानी रह चुकी है। भारत में ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजी हुकूमत ने भारत के सभी अफसरों एवं कर्मचारियों के लिए राजस्थानी भाषा की जानकारी अनिवार्य कर रखी थी। इंपीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया 1901 इसका पुख्ता प्रमाण है। आजादी के बाद हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए राजस्थानी वासियों ने अपनी मातृभाषा राजस्थानी की कुर्बानी दी थी जिसके दुष्परिणाम स्वरूप आजादी के 79 वर्षों बाद भी अपनी मातृभाषा को कानूनी मान्यता नहीं दिला पाये इसके लिए जनता एवं नेता दोनों पक्ष जिम्मेदार है राजस्थानी भाषा की मान्यता का आंदोलन गांधीवादी विचारधारा से 100 वर्षों से चला आ रहा है। प्रदेश सरकार ने भी 25 अगस्त 2003 को राजस्थान विधानसभा से राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने का संकल्प सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया था। तत्पश्चात अब तक 15 से अधिक पत्र केंद्र सरकार को राजस्थान सरकार इस मुद्दे के निवारण हित लिख चुकी है। केंद्र सरकार की बहानेबाजी जारी है। केंद्र का कहना है कि राज्य पहले अपने स्तर पर राजस्थानी को प्रदेश की द्वितीय राजभाषा बनाएं तत्पश्चात केंद्र सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेगी। इसलिए अब यह जरूरी हो गया है कि प्रदेश के सभी विधायक राजस्थानी भाषा को कानूनी मान्यता के लिए चालू बजट सत्र में पुरजोर मांग उठाएं। यदि निजी प्रस्ताव आता है तो दलगत भौतिक सोच से ऊपर उठकर उसका समर्थन करें। इससे प्रदेश का भला होगा एवं युवा पीढ़ी को रोजगार के और अधिक अवसर मिलेंगे।