राजस्थान बजट 2026: यूनानी विभाग को लेकर चिकित्सकों में निराशा- डॉ चौहान

राजस्थान बजट 2026: यूनानी विभाग को लेकर चिकित्सकों में निराशा- डॉ चौहान

राजस्थान बजट 2026: यूनानी विभाग को लेकर चिकित्सकों में निराशा- डॉ. चौहान

रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

सोजत सिटी। राजस्थान सरकार के हाल ही में प्रस्तुत आम बजट पर विभिन्न क्षेत्रों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों को यह बजट पसंद आया, तो कुछ को इसमें कई कमियां नजर आईं। विशेष रूप से यूनानी विभाग को लेकर इस बार के बजट में कोई उल्लेखनीय घोषणा नहीं की गई, जिससे यूनानी जगत से जुड़े चिकित्सकों में निराशा देखी जा रही है।

इसी विषय पर जब हमने यूनानी फिजीशियन और हिजामा थेरेपिस्ट डॉ. मो. मोईनुद्दीन चौहान से बातचीत की, तो उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की। डॉ. चौहान ने कहा कि "वर्तमान सरकार ने बजट में कई नई योजनाओं की घोषणा की है। मगर, यूनानी चिकित्सकों की नई भर्ती या नई डिस्पेंसरी खोलने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़े लोगों में निराशा है।"

उन्होंने आगे कहा कि "राजस्थान सरकार में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरवा के पास ही आयुष मंत्रालय है, इसके बावजूद भी यूनानी विभाग को लेकर किसी विशेष योजना का ऐलान नहीं किया गया। यह यूनानी चिकित्सकों के लिए खेदजनक है।" 

राजस्थान के हालिया बजट (2026-27) में **यूनानी चिकित्सा** (Unani Medicine) को लेकर कोई खास प्रावधान या नई घोषणा नहीं की गई है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़े लोग और चिकित्सक काफी निराश हैं।

बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र पर फोकस तो है—जैसे मुख्य चिकित्सालयों में विश्राम गृह, न्यूरोलॉजी विभाग, पेडियाट्रिक ICU, फायर सेफ्टी उपकरण, और आयुर्वेद चिकित्सा संस्थानों में आधारभूत विकास कार्यों की बात हुई है। लेकिन यूनानी, होम्योपैथी या अन्य AYUSH शाखाओं (सिवाय आयुर्वेद के कुछ सामान्य उल्लेख के) के लिए अलग से कोई नई फंडिंग, नई योजनाएं, अस्पतालों का विस्तार या विशेष पैकेज नहीं मिला। 

राजस्थान में यूनानी चिकित्सा के तहत अस्पताल और डिस्पेंसरी चल रही हैं, लेकिन बजट दस्तावेजों और घोषणाओं में इनके लिए कोई अतिरिक्त बजट या विकास का जिक्र नहीं है। इससे लगता है कि सरकार ने इस पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को नजरअंदाज कर दिया, जबकि आयुर्वेद को कुछ हद तक जगह दी गई। 

**निराशाजनक खबर** के रूप में ये देखा जा रहा है कि यूनानी चिकित्सा के डॉक्टर, छात्र और मरीजों को उम्मीद थी कि AYUSH को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ राहत मिलेगी, लेकिन बजट में "कुछ नहीं मिला"। कई लोग इसे AYUSH के प्रति सरकार की उदासीनता मान रहे हैं। 

अगर यूनानी चिकित्सा के समर्थक या इससे जुड़े लोग इस मुद्दे को उठाएंगे, तो शायद भविष्य में सुधार हो सकता है, लेकिन फिलहाल ये बजट उनके लिए मायूस करने वाला रहा। 

आयुष चिकित्सा पद्धति को भारत में प्राचीन और प्रभावी चिकित्सा प्रणाली माना जाता है, लेकिन सरकारी स्तर पर इसे अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है। यूनानी चिकित्सा पद्धति को अधिक बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों की मांग है कि सरकार इस ओर ध्यान दे।