कार्यस्थल और मातृत्व : संतुलन की कला : डॉ. श्वेता शर्मा

कार्यस्थल और मातृत्व : संतुलन की कला : डॉ. श्वेता शर्मा

कार्यस्थल और मातृत्व : संतुलन की कला : डॉ. श्वेता शर्मा

“माँ” — यह केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि असीम ममता, अडिग साहस, आत्मबल और नेतृत्व का प्रतीक है। आज की कार्यरत माँ केवल घर की व्यवस्थापिका नहीं, बल्कि समाज, कार्यस्थल और वैश्विक मंच पर भी नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि मातृत्व और करियर के बीच संतुलन संभव है, और इस संतुलन में महिला से महिला को सहारा देना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

घर से कार्यस्थल तक: कार्यरत माँ की पहचान

जब बच्चा जन्म लेता है, तो माँ केवल स्नेह और सुरक्षा ही नहीं देती, बल्कि पहली शिक्षक, मार्गदर्शक और प्रेरक भी बनती है। कार्यरत माँ यह संदेश देती हैं कि सपने और जिम्मेदारियाँ दोनों निभाई जा सकती हैं।

आज की दुनिया में कार्यरत माँ — चाहे विज्ञान, खेल, कला, मीडिया, राजनीति या डिजिटल क्षेत्र में हों — अपने करियर और मातृत्व दोनों में उत्कृष्टता दिखा रही हैं।

लेकिन सिर्फ संतुलन बनाना पर्याप्त नहीं है। आज की सशक्त कार्यरत माँ महिला से महिला को पहले सहारा देना भी सीखती है — चाहे परिवार में बहन, बेटी, पत्नी के रूप में हो या कार्यालय में सहकर्मी और टीम के सदस्य के रूप में।

सहारा देना और समर्थन करना — यही महिला नेतृत्व का सबसे सुंदर रूप है।

ऐतिहासिक प्रेरणा: मातृत्व और नेतृत्व का संतुलन

इतिहास में कई माताएँ ऐसी रही हैं जिन्होंने परिवार और समाज में नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण दिया:

अहिल्याबाई होलकर: मातृत्व और शासन में संतुलन।

रानी लक्ष्मीबाई: मातृत्व और देशभक्ति का संगम।

झलकारी बाँझ: मातृत्व और संघर्ष में प्रेरक।

ये उदाहरण आज की कार्यरत माताओं के लिए संकेत हैं कि घर, करियर और महिला‑सहारा तीनों ही जिम्मेदारी निभाई जा सकती हैं।

समकालीन कार्यरत माताएँ: प्रेरक उदाहरण

1. मैरी कॉम — खेल और मातृत्व का संतुलन

भारतीय मुक्केबाज़ी की योद्धा मैरी कॉम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपलब्धियाँ हासिल करते हुए मातृत्व के साथ खेल करियर को संतुलित किया। उन्होंने दिखाया कि माँ होना सफलता की राह में बाधा नहीं, बल्कि प्रेरणा है।

2. दीपिका पादुकोण — बॉलीवुड और मातृत्व

दीपिका पादुकोण ने मातृत्व, मानसिक स्वास्थ्य और करियर के बीच संतुलन को खुले दिल से संभाला। उन्होंने यह साबित किया कि माँ होने के बावजूद सपने पूरे किए जा सकते हैं, और “mom guilt” को स्वीकार करना भी जीवन का हिस्सा है।

3. इंदिरा नूयी — वैश्विक नेतृत्व और मातृत्व

पीप्सिको की पूर्व CEO इंदिरा नूयी ने मातृत्व और वैश्विक नेतृत्व का संतुलन बखूबी स्थापित किया। उन्होंने कार्यस्थल पर माताओं के लिए नीतियाँ बनाई और महिला से महिला समर्थन को बढ़ावा दिया।

4. मिताली राज — खेल और परिवार

भारतीय महिला क्रिकेट की कप्तान मिताली राज ने खेल के उच्चतम स्तर पर अपने करियर को बनाए रखा और मातृत्व के भावनात्मक पक्ष को भी अपनाया।

5. रवीन ड्रॉय — डिजिटल युग की माँ

एकल और कार्यरत माँ रवीन ने लेखन और कंटेंट क्रिएशन में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने दिखाया कि माँ होने के बावजूद डिजिटल दुनिया में नेतृत्व और सृजनशीलता स्थापित करना संभव है।

6. सुनीता विलियम्स — अंतरिक्ष और मातृत्व

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष मिशनों में भाग लेकर यह दिखाया कि माँ के रूप में विज्ञान और तकनीक में विश्व स्तरीय सफलता संभव है।

महिला से महिला पहले समर्थन: परिवार और ऑफिस में भूमिका

आज की कार्यरत माँ सिर्फ अपने घर या करियर तक सीमित नहीं हैं। महिला‑नेतृत्व का असली मूल्य तब समझ आता है जब वह दूसरी महिलाओं को सहारा और मार्गदर्शन देती हैं।

परिवार में महिला‑सहारा

बहन, बेटी, पत्नी या सास — माताएँ परिवार की अन्य महिलाओं को समर्थन, प्रेरणा और सुरक्षा देती हैं।

बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण और महिला रोल मॉडल की भूमिका निभाती हैं।

ऑफिस और कार्यस्थल में महिला‑सहारा

टीम में महिला सहयोगियों का समर्थन करके सशक्त नेतृत्व स्थापित किया जा सकता है।

वरिष्ठ महिला सहयोगी न केवल करियर में मार्गदर्शन देती हैं, बल्कि अन्य माताओं के लिए लचीलापन, समझ और मार्गदर्शन भी प्रदान करती हैं।

ऐसा वातावरण सृजनात्मकता, आत्मविश्वास और सफलता को बढ़ावा देता है।

माँ और कार्यरत महिला दोनों ही यह दिखाती हैं कि सहयोग और सहारा देना ही सशक्त नेतृत्व की नींव है।

कार्यस्थल और मातृत्व: चुनौतियाँ और समाधान

कार्यरत माँ अपने घर और कार्यस्थल के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए निरंतर संघर्ष करती हैं।

वर्क‑लाइफ बैलेंस: घर की जिम्मेदारियाँ और नौकरी का दबाव।

“Mom guilt”: बच्चों के लिए पर्याप्त समय न मिलने का भाव।

करियर में प्रगति और मातृत्व: कभी-कभी कार्यस्थल में मान्यता और लचीलापन की कमी।

समाधान:

परिवार और कार्यस्थल में महिला से महिला सहारा।

लचीले कार्य समय और मानसिक स्वास्थ्य की सुविधा।

समर्थन नेटवर्क का निर्माण।

समाज और नीति का समर्थन

आज कई देशों में कार्यस्थल माताओं के पक्ष में नीतियाँ लागू कर रही हैं:

लचीला कार्य समय, मातृत्व और पितृत्व अवकाश, चाइल्ड-केयर सुविधा।

महिला से महिला समर्थन को बढ़ावा देना, जिससे सकारात्मक और प्रेरक कार्यस्थल बन सके।

यह दर्शाता है कि कार्यरत माँ का नेतृत्व और महिला‑सहारा सिर्फ व्यक्तिगत प्रयास नहीं, बल्कि समाज और संरचनात्मक समर्थन से संभव है।

निष्कर्ष: कार्यरत माँ — नेतृत्व, संतुलन और महिला‑सहारा

“कार्यस्थल और मातृत्व: संतुलन की कला” केवल एक विषय नहीं, बल्कि सशक्त जीवन दर्शन है।

कार्यरत माँ अपने बच्चों को यह सिखाती हैं कि धैर्य, साहस और आत्मबल सबसे मूल्यवान साथी हैं। वही माँ अपने सपनों की उड़ान भरती हैं, अपने बच्चों की दुनिया को संवारती हैं और कार्यस्थल में सशक्त नेतृत्व की मिसाल कायम करती हैं।

साथ ही, माँ यह भी दिखाती हैं कि महिला से महिला समर्थन सबसे सशक्त हथियार है, चाहे परिवार में हो या ऑफिस में।

माँ की ममता — घर का पहला प्रकाश।

माँ की प्रेरणा — करियर की पहली उड़ान।

माँ का नेतृत्व और महिला‑सहारा — विश्व की प्रेरक शक्ति।

लेखिका: डॉ. श्वेता शर्मा

पद: सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग

संस्थान: एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. स्वायत्त महाविद्यालय, जयपुर (राजस्थान)