पुस्तक समीक्षा : भक्ति रस में सराबोर करता काव्य संग्रह : राम अविराम
पुस्तक समीक्षा : भक्ति रस में सराबोर करता काव्य संग्रह : राम अविराम
साहित्य के प्रति समर्पित होकर की गई साहित्य साधना ही लोक कल्याण कर सकती हैं साहित्य मनुष्य को भीतर से सुसंस्कृत और उन्नत बनता है। साहित्य केवल जानकारी नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, विचारों और सौंदर्य को व्यक्त करने का एक मध्यम है।
साहित्य के द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम राम पर अपने भाव प्रकट करने वाला, भारतीय संस्कृति का पालन करने वाला आवश्यक होता है। उसके मन मस्तिष्क में कहीं आदर्श का प्रादुर्भाव अवश्य प्रस्फुटित होता है, इन्हीं भावों से अभिभूत हो वीना मावर वर्तिका ने राम अविराम संग्रह की रचना कर अपनी प्रतिभा को प्रखर करने का निश्चय किया है।
इस काव्यात्मक प्रस्तुति में मर्यादा, धर्म, आदर्शता, शालीनता, त्याग, समर्पण के भावों को प्रदर्शित करने का प्रयास किया है जो पाठक को भक्ति रस में सराबोर करता है।
वर्तिका काव्य संग्रह के बाद साहित्य दुनिया में चर्चा में आई वीना मावर का दूसरा काव्य संग्रह राम अविराम फिर चर्चा में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम पर अविराम यानि बिना रुके राम के सुंदर व आकर्षण को दर्शाया हैं यह संग्रह राम के नाम का पूर्ण रूप से गुणगान करता है उनके उत्कृष्ट चरित्र, आदर्श आचरण और उच्च नैतिक मूल्यों को अपने भावों की अभिव्यक्ति देता है।
काव्य की कमनीयता छंदोंबद्ध सृजन में अधिक प्रभावी होती है। दो पंक्ति के दोहे में अपने भावों को 13-11 की मात्राओं के साथ तुकांत करना होता है तब उसका वैभव पाठक के सामने आलोकित होता है। दोहे के विपरीत सोरठे में तुक मध्य में आता है 11-13 मात्राएं होती हैं। जिसका लेखिका ने पालन करते हुए संग्रह में सुन्दर अभिव्यक्ति दी है।
आपने अपने काव्य में मर्यादा पुरुषोत्तम राम को बहुत से नाम से अलंकृत किया है जैसे को कौशलेंद्र राघवेंद्र अवघेन्द्र भारतेंद्र और जगतेंद्र जिससे काव्य प्रतिभा प्रदर्शित हुई है। प्राणी मात्र ने पुरुषोत्तम राम का स्मरण किया उसका उद्धार अवश्य हुआ। आपके सृजन में भक्ति का अर्जन है मुक्ति का प्रवर्तन है ईश्वर आराधना के साथ आध्यात्मिक उपासना के भाव सहज सरल शब्दों में प्ररिल्क्षित होते हैं।
आपका यह प्रयास सराहनीय है जो आत्मशुद्धि और आत्मानुभूति का माध्यम बनेगा।
पुस्तक की छपाई और कागज उच्च क्वालिटी के हैं। पुस्तक में चित्र देकर इसकी काव्य सुंदरता को और बढ़ा दिया है। आवरण मनमोहक व आकर्षित करने वाला है।
मैं वीणा मावर वर्तिका के इस काव्य प्रतिभा को नमन करता हूं और आपके अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की विशेष कामना करता हूं।
पुस्तक : राम अविराम
लेखक : वीणा मावर वर्तिका
समीक्षक : अब्दुल समद राही
पृष्ठ संख्या : 177
मूल्य : 299 रुपए
प्रकाशन वर्ष : 2025
प्रकाशक : "द ग्रेट इंडियन बुक टूर"
106/91, अशोक मार्ग, विजय पथ मानसरोवर, जयपुर, राजस्थान-302020