भारत मैं आज गाय की दुर्गति क्यों ? कौन है जिम्मेदार ?
Bharat main Gay ki Dugati ka karan
भारत में आज गाय की दुर्गति क्यों ? कौन है जिम्मेवार ?
उत्तराखंड/दूध पीते हैं तो गाय की सेवा करते हैँ, और गाय दूध नहीं देती है,तो सड़कों पर ,गलियों में छोड़ दी जाती है
#श्रीराम_गायवाले_ हनुमानजी
। हमारा हिन्दू समाज जो अपने को सनातनी कहलवाता है और है भी, वही आज गाय की दुर्गति का कर्णधार बना हुआ है । एक ओर तो आस्था कहती है की गाय हमारी माता स्वरूप है ,33 कोटी देवता 14 भुवन इसके अंदर हैं ,देवि देवता और पित्रों का आश्रीवाद गाय की सेवा से मिलते हैं ,दूसरी तरफ मानव इतना स्वार्थी हो गया है कि हमारे संस्कार सब एक किनारे रखकर केवल मतलव परस्त होकर रह गया है ।
निजी स्वार्थ सर्वोपरि है ,पाप पुण्य किसने देखा है ,यह भावना जन्म ले चुकी है ,कुकर्म चरम पर है,सुकर्म की गति मंद हो चुकी है । मैदानों से लेकर पहाड़ों तक यह कृत्य हो रहा है । दूर उत्तराखंड के पहाड़ों को भी यह कृत्य झकझोर कर रख देता है । जो गाय दूध नहीं देती है उसे जंगलों मैं पेड़ पर बांध दिया जाता है,और इतना ही नहीं बल्कि उसका मुह बांध दिया जाता है ,ताकि वह रंभा न सके।और जंगली जानवर बाघ चीता शेर उसे आसानी से निवाला बना सके कुकर्म की गति चरम पर है ,एटनी आगे जा चुकी है की गाय की कहानी केवल दर्द बनकर एक कोने मैं बैठ गई है। कोई सुनने वाला नहीं है। ना ही सरकार और ना ही सर्वोच्च न्यायालय । छोटी छोटी राजनैतिक गतिविधियों को सुनने वाला सर्वोच्च न्यायालय आज आजादी के इतने वरस बाद भी गाय की पुकार नहीं सुनता । हे गायवाले हनुमानजी अब आप ही हमारा एक मात्र सहारा हैं आप ही हमारी पुकार सुन सकते हैं ।