हाईकोर्ट के नियमो की उड़ाई गई धज्जियां केविएट के बावजूद सरकार को मिला एकतरफा स्थगन
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हाईकोर्ट के नियमों की उड़ाई गई धज्जियां, केविएट के बावजूद सरकार को मिला एकतरफा स्थगन
दौसा। राज्य के होमगार्ड की पारंपरिक रोटेशन प्रणाली और उससे उत्पन्न आर्थिक व सामाजिक संकट को गंभीरता से लेते हुए कुछ माह पूर्व हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि प्रत्येक होमगार्ड को प्रतिमाह न्यूनतम 22 दिन की ड्यूटी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही रोटेशन प्रणाली को समाप्त करने एवं होमगार्ड के हित में कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे।
कोर्ट ने सरकार को तीन माह के भीतर अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे। लेकिन निर्धारित समय के बाद सरकार को एकतरफा स्थगन आदेश मिल गया। जिससे होमगार्डों में नाराजगी और चिंता का माहौल बन गया है।
इधर याचिकाकर्ताओं का कहना है कि याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता द्वारा पहले ही केविएट दाखिल कर रखी गई थी। इसके बावजूद सरकार को एकतरफा स्थगन आदेश दे दिया गया। जबकि नियमों के अनुसार केविएट होने की स्थिति में संबंधित पक्ष को सूचना देकर सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था।
होमगार्ड पक्ष का कहना है कि उन्हें बिना किसी सूचना और सुनवाई के ही सरकार को राहत दे दी गई। यहां तक कि उनके अधिवक्ता को भी इस स्थगन आदेश की कोई जानकारी नहीं थी। बाद में जब इसकी सूचना मिली तब तक आदेश पारित हो चुका था।
इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में भी एकतरफा स्थगन प्राप्त कर लिया। जिससे राजस्थान के होमगार्डों में चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं।
वहीं दूसरी ओर चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा से संबंधित मामलों में सरकार द्वारा दाखिल केविएट का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। इन मामलों में दर्जनों रिट याचिकाएं लंबित हैं। जिनमें न्यायालय द्वारा दूसरे पक्ष को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।
एक ओर सरकार के केविएट का पूर्ण पालन और दूसरी ओर होमगार्ड मामलों में अनदेखी को लेकर याचिकाकर्ताओं ने दोहरे रवैये का आरोप लगाया है। इस असमान व्यवहार के चलते मामला अब नाटकीय मोड़ ले चुका है और होमगार्डों में भारी असंतोष व्याप्त है।