नाटक "जामुन का पेड़ " का सफल मंचन
नाटक "जामुन का पेड़ "
का सफल मंचन
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विश्व रंगमच दिवस पर इप्टा राष्ट्रीय नाट्य रंगोत्सव के अन्तर्गत रंग-शिल्प , जयपुर की ओर से पिछले दिनों यहां निरन्तर सफलता के पायदान छू रहा नाटक "जामुन का पेड़" का सफल मंचन किया गया। यह नाटक रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में मंचित हुआ । रंगकर्मियों ने रवीन्द्र मंच के हो रहे हाल बेहाल और दुर्दशा पर ध्यान आकर्षित कराने के लिये इस नाटक को समर्पित क़िया था । सांस्कृतिक पृष्टभूमि भूमि पर यदि इसका जिक्र किया जाय तो रवींद्र मंच जयपुर का ह्रदय स्थल रहा है। अतीत सुनहरे इतिहास को देखा जाय तो जयपुर में रवींद्र मंच साहित्य एवं कला संस्कृति के साथ नाटकों के संवर्धन और संरक्षण का मुख्य सेतु रहा है।
मशहूर अफ़साना निगार मरहूम कृष्ण चन्दर द्वारा रचित इस जामुन का पेड़ कहानी का भाई नीरज गोस्वामी ने नाट्य रूपान्तरण किया है जबकि इस नाटक के निर्देशक थे भाई गुरमिन्दर सिंह पुरी 'रोमी'।
व्यवस्था तंत्र की कार्य शैली में किस तरह के व्यवधान उलझनेऔर उदासीनता का माहौल रहता है उसका सजीव चित्रण इस नाटक में देखने को मिलता है। नाटक सभी पात्रो ने अपने अपने किरदार में डूबकर सशक्त और सजीव भूमिका निर्वहन किया है। प्रसिद्व शायर और उभरते कलाकार लोकेश कुमार सिंह साहिल नीरज गोस्वामी ईश्वर दत्त माथुर राजेन्द्र शर्मा 'राजू' मोइनुद्दीन ख़ान गुरमिन्दर सिंह पुरी 'रोमी' अशोक महेश्वरी आलोक चतुर्वेदी जीतू दीपक कथूरिया धनराज दाधीच , यादवेन्द्र आर्य 'याद' श्रेया गोठवाल एवं अन्य कलाकारों ने अपना सशक्त अभिनय से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।रवींद्र मंच का फिर से संवर्धन और उत्थान हो इस दिशा में नाटक का मंचन एक सराहनीय प्रयास है।
गोविन्द शर्मा