होली का नव गीत-2026 : वेदव्यास

होली का नव गीत-2026 : वेदव्यास

होली का नव गीत-2026 : वेदव्यास

चाहे कोई रंग उड़ायें, चाहे कोई रास रचायें

चाहे कैसा भी गुलाल हो, होली है दिलवालों की।

ये होली है कलमकार की, जीवित बातें लिखती है

ये होली है सूत्रधार की, आसमान सी दिखती है।

ये होली है चित्रकार की, धुंधले रंग नहीं भरती

ये होली है शिल्पकार की, युग का अभिवादन करती।

ये होली किसान भाई की, अधुनातन से जो डरती

ये होली सैनिक वीरों की, मर कर जो जीवित रहती।

ये होली है मजदूरों की, जिसका गर्म पसीना है

ये होली है उन फूलों की, जिनको जीवन जीना है।

चाहे कोई रंग उड़ायें, चाहे कोई रास रचायें

चाहे कैसा भी गुलाल हो, होली है दिलवालों की।

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पूर्व अध्यक्ष साहित्य अकादमी उदयपुर।

मालवीय नगर जयपुर।