बेकाल ओरण में पीपल के पेड़ की शादी बड के पेड़ से धूमधाम से सम्पन्न
बेकाल ओरण में पीपल के पेड़ की शादी बड के पेड़ से धूमधाम से सम्पन्न
महंत डॉ नानक दास जी महाराज का मिला पावन सानिध्य
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
नागौर। सिंगड बेकाल धौरा के नीचे बेकाल ओरण मे बेकाल नाडा के औरण मे पीपल के पेड़ की शादी बड के पेड़ से करवाईं गई।
यह कार्यक्रम पुज्य गुरुदेव महंत डॉ नानक दास जी महाराज के पावन सानिध्य में ग्रामीण वासियों ने सामूहिक मिलकर महिलाओं द्वारा मंगल गीत के साथ बड और पीपल के बीच मोली का धागा बांध कर वैदिक विधि विधान के साथ वैवाहिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ ।

महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित पद्मश्री हिम्मतराम जी भांभू साहब की पावन उपस्थित में बहुत ही सुंदर ऐतिहासिक कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर बारात वालों की तरफ से बड को दूल्हा बनाकर मांडा तक पहुंचे और छड़ी के साथ तोरणद्वार पर तोरण सम्मेला करके चंवरी पर बैठे और कन्या पिपल को भी बिठाया, वैदिक मंत्रों के साथ हवन में आहुति करते हुए चंवरी पर अर्थ धर्म काम मोक्ष का साथ फेरा करवा कर पर्यावरण रक्षा का संकल्प दिलाया तथा पेड़ को पानी खींचने का सेवरा दान किया।
सभी महिलाओं ने विवाह के गीत गाते हुए नाचने लगी। कन्यादान में कपड़ा चांदी की अंगूठी मंगलसूत्र सोने की अंगूठी सहित अंगवस्त्र भेंट बर्तन भी भेंट किया।
बड पीपल की शादी में आए हुए सभी अतिथियों को ग्रामीण पुरुषों की तरफ से हलवा पकौड़ी की प्रसादी की व्यवस्था की गई ।

तुलसी पूजन के बाद सत्संग का शुभारंभ हुआ
आए हुए सभी संगीतकारों ने भजनों के माध्यम से अपनी भजनों की प्रस्तुति देते हुए बहुत ही सुंदर मधुराम वातावरण बनाया। इसी बीच में भामाशाह अलाय से मोहन राम सुथार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए पुर्व में हजारों पीपल वृक्ष बांटे गए और इस पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए लोगों से आवाहन किया गया अधिक से अधिक पीपल के पेड़ लगाए । पर्यावरण प्रेमी दुदाराम जी भाम्भू ने बताया कि सुथार समाज चैरिटेबल ट्रस्ट सूरत की तरफ से गौ चिकित्सा की आयुर्वेदिक नुस्खे की किताब सभी को वितरित की गई। पर्यावरण प्रेमी गौ लोकवाशी गौसेवी संत श्री पदमाराम जी कुलरिया परिवार की तरफ से पर्यावरण चेतना स्मारिका की पुस्तक आए हुए सभी लोगों को वितरित की गई। शंकर लाल जी सुथार ने कबीर जयंती पर विशेष सहयोग भी किया था। दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में अखिल भारतीय कबीर मठ की ओर से शंकर लाल जी कुलरिया को कबीर कोहिनूर सम्मान से सम्मानित किया गया।
पेड़ पौधे पर्यावरण रक्षा के क्षेत्र में पूरे भारत में पद्मश्री हिम्मताराम भांभू ने नागौर का मान सम्मान बढ़ाया। जो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं लोगों को प्रेरणा मिलती है। पर्यावरण रक्षा की ।
पीपल की शादी समारोह मे पीपल कन्या की तरफ़ से दुदाराम भांभू सिंगड सहीत पांच जोड़ा सहित यजमान हवन पर बैठे।
राजस्थान में पीपल (अक्सर पीपल-पीपली या पीपल-बरगद) का विवाह एक अनूठी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय परंपरा है, जो आमतौर पर पीपल पूर्णिमा या वैशाख माह में होती है। यह एक प्रतीकात्मक विवाह है जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, ।
राजस्थान में पीपल विवाह की मुख्य बातें:
उद्देश्य: पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना और पेड़ों को सांस और जीवन के रक्षक के रूप में सम्मानित करना।
प्रक्रिया: पीपल के पेड़ को दुल्हन और अक्सर बड़ (बरगद) के पेड़ को दूल्हा माना जाता है, जिन्हें सजाकर, साड़ी पहनाकर विवाह कराया जाता है।
स्थान: यह परंपरा राजस्थान के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्र जिसमें नागौर जिले का सिंगड गांव में पर्यावरण प्रेमी महन्त डॉ नानक दास जी महाराज के पावन सानिध्य में यह विशाल वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
रस्में: इस विवाह में लगन, हल्दी-मेहंदी, तोरण, सात फेरे, कन्यादान, और प्रीतिभोज जैसी सभी रस्में पारंपरिक तरीके से की गई।
मान्यता: माना जाता है कि पीपल को अविवाहित रखना अशुभ होता है, इसलिए उनका विवाह करना पुण्यदायी होता है।
इस अनूठी शादी के के माध्यम से, ग्रामीण लोग प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा और जिम्मेदारी निभाते हैं, जहाँ पूरे गांव के लोग मिलकर भाग लेते हैं।
पिछले साल चोमासा में जब बरसात नहीं हो रही थी फसल सुख रही थी सबके चेहरे पर निराशा थी फिर भी पूरे गांव के लोग इकट्ठे होकर बेकाल धौरा के नीचे बेकाल नाडा की पाल पर बैठकर इंद्रमेघ महायज्ञ पुज्य गुरुदेव नानक दास जी महाराज के उपस्थित में करवाया था और फिर तो भारी बारिश से पुरा तलाब भर गया था लोगों की आस्था है विश्वास है पर्यावरण के प्रति और ईश्वर के प्रति भगत की बात भगवान जरूर सुनता है और उनका काम भी करता है यह आज भी प्रमाणिक है।
आकाशवाणी नागौर एफएम बैंड के उद्घोषक मोहम्मद शरीफ छीपा ने चिरमी चैनल के माध्यम से कार्यक्रम को रिकॉर्ड किया गया जिसका प्रसारण दिनांक 1 मई को रात्रि 9:00 बजे से 9:30 बजे तक आधा घंटा का कार्यक्रम लाईव प्रसारण होगा।
पुज्य गुरुदेव महंत डॉ नानक दास जी महाराज ने सत्संग सभा को सम्बोधित करते हुए एक भजन सुनाया जगमे संत भलाई ही आया, राम नाम गुरू ज्ञान प्रकाशितया, भ्रम अज्ञान मिटाया... प्रवचन जन हित में कबीर की साखी
भक्ति भाव भादौं नदी, सबै चलीं घहराय ।सरिता सोई सराहिये, जेठ मास ठहराय । तरुवर सरवर संत जना चौथा बरसे मेह । परमार्थ के कारणे चारों धारी देह।। पेड़ पौधे तालाब बरसात साधु संत यह जनहित परमार्थ कार्य में अपना योगदान देते हैं।
बेताल नाडा जेठ वैशाख के महीने में पानी से भरा हुआ है यह ईश्वरीय चमत्कार है।
आए हुए सभी लोगों ने जय घोष करते हुए सबको विदा किया।