एक ऐसे महान पुरुष का इतिहास जिससे नवपीढी में होगा संस्कारों का प्रादुर्भाव : श्री महर्षि लोकमणि व्यास
एक ऐसे महान पुरुष का इतिहास जिससे नवपीढी में होगा संस्कारों का प्रादुर्भाव
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*श्री महर्षि लोकमणि व्यास*
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मेडतासिटी। मीरा नगरी मेड़ता राजस्थान में मीरा स्मारक के मीरा शोध संस्थान में एक भव्य कार्यक्रम 'लोकमणि अध्यात्म एवं साहित्य संगम' के अंतर्गत मेड़ता के 350 वर्ष पूर्व जन्मे दिव्य महापुरुष एवं चमत्कारिक विभूति महर्षि लोकमणिजी व्यास (पारीक ब्राह्मण) के जीवन पर लिखित पुस्तक का विमोचन किया गया जिसे वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य निरंजन प्रसाद पारीक ने गहन शोध करके लिखा। वैदिका आध्यात्मिक सेवा संस्थान डेगाना जंक्शन के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के समन्वयक महेंद्र कुमार पारीक प्रधानाध्यापक राजकीय संस्कृत विद्यालय मेड़ता ने बताया कि महर्षि लोकमणिजी व्यास एक महान सिद्धपुरुष थे, उनके चमत्कारों की घटनाएं जो पहले के बुजुर्गों में व्याप्त थीं वे आज मेड़ता से धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है हमें महापुरुषों की पहचान को जीवित रखना चाहिए इसी उद्देश्य को लेकर यह कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामस्नेही संत श्री गोवर्धनदास जी द्वारा की गई। अखिल भारतीय साहित्य परिषद अजमेर इकाई से आए प्रतिनिधियों में उमेश कुमार जी चौरसिया कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रहे।
लोकमणिजी की यज्ञस्थली और निर्वाणस्थली आज भी मेड़ता में स्थित है। एक चमत्कार के अनुसार इन्होंने सूर्य की गति को रोककर भी दिखाया था। मेड़ता की स्थापना के समय से ही इनका परिवार चारभुजामंदिर में कथावाचन का कार्य करता था जिसके लिए जोधपुरदरबार से इन्हें मासिक सनद भी मिलती थी। पारीक व्यास परिवार में जन्मे लोकमणिजी ने एक अद्भुत महापुरुष के रूप में जोधपुर के राजाओं में अभयसिंहजी विजयसिंहजी बखतसिंहजी पर विशेष प्रभाव डाला था।
लोकमणिजी के चमत्कारों की घटनाएं आज भी मेड़ता में लोगों द्वारा कही सुनी जाती है़। हालांकि लोकमणिजी द्वारा किए गए चमत्कार केवल परिस्थितिजन्य है बाकी उनके महानतम व्यक्तित्व के समक्ष चमत्कार एक बहुत ही तुच्छ चीज है, उन्होंने साधना और विज्ञान के समन्वय से अध्यात्मदर्शन के कईं आयाम स्थापित किए थे।
लोकमणिजी के परिवार द्वारा लोगों को दिए गए ब्याज की पोथियां संयुक्त राष्ट्र संगठन न्यूयार्क में रखी गई हैं, जिन पर सैकड़ो विदेशी शोधकर्ताओं ने पीएचडी की है। ऐसे महान संत को भारत के लोग बहुत कम जानते हैं।
लोकमणिजी के इतिहास को सजीव करने के उद्देश्य से समायोजित कार्यक्रम में अनेक विद्वानों, साहित्यकारों, अध्यात्मजगत की हस्तियों ने शिरकत की और उनके महान व्यक्तित्व, उनकी तप- साधना- चमत्कार -सिद्धियों के विषय में चर्चा की।

नथमल शर्मा कौशिक ने भेंट किए उपहार
महर्षि लोकमणिजी व्यास (पारीक ब्राह्मण) के जीवन पर लिखित पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में मेड़ता के शिक्षाविद समाजसेवी भामाशाह नथमल शर्मा कौशिक ने 15 आगंतुक व्यक्तियों को व्यक्ति गत रूप से सभी को शॉल,पेन व डायरी तथा श्री मीरांबाई एवं श्री चारभुजा नाथ का मोमेंटो गिफ्ट किया गया था।