कविता- आओ मित्र : किशन कबीरा
कविता- आओ मित्र : किशन कबीरा
हे ईश्वर , ऐसा दिन कभी मत दिखाना
कि अपने मित्रों और पड़ोसियों को
दुश्मन की तरह देखना पड़े
कि काल्पनिक आशंकाओं को
विडम्बनाएँ मानकर मन गढ़ने लगे
दुश्मनी की वजहें
मैं कभी नहीं करूँगा सहन
कि कोई ऐरागेरा
खास बनने की जुगाड़ में
मंढ़ने लगे
क़मर मेवाड़ी और अफ़ज़ल साहब जैसी शख्सियतों पर
देश विरोधी होने के आरोप
मैं हरहाल में करूँगा विरोध
कि वजह को ठोस करने के षड़यंत्र में
मनगढ़ंत आरोपों के साथ
कोई शख्स
उठाए शक की अंगुली
शैख़ अब्दुल हमीद और इलियास जैसे मित्रों की
देशभक्ति पर
मैं जानता हूँ
हवा के पक्षपाती रवैये की
इसी वजह से नहीं किया गया
पुरस्कार के लिये
कवि मित्र राही की पुस्तक का चयन
आओ मित्र माधव नागदा
और तुम भी आओ
साथी अखिल, पिंटू, राजकुमार
और उर्वरा सोच के वाहक नई पीढ़ी के कवियों
आओ , नफरतों से अटी दुर्गंध मारती बंजर जमीन पर
फिर से रस भरे खट्टे- मीठे आमों वाली
प्रेम की पौध रोपें
गली- गली, मोहल्ला- मोहल्ला घूम- घूमकर
' ईश्वर अल्लाह तेरो नाम ' गायें
और सभी को सन्मति आए
ऐसी ही प्रार्थनाएँ दुनिया के मन में बैठाएँ
भले ही कोई भेद - विभेद की हज़ारों वजहें गिनाए
पर हम जानते हैं
निश्चित ही वे सब लालची मन की
आधारहीन, झूठी और मनगढ़ंत बातें हैं
भले ही दुनिया लाख इल्ज़ाम लगाए
पर हरहाल में
इंसानियत के पक्ष में खड़ा होना फर्ज है
और निभाना, हम सभी की जिम्मेदारी।
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राजसमंद, राजस्थान