ओम प्रकाश चौहान: शब्दों से समाज को दिशा देने वाले संपादक
ओम प्रकाश चौहान जी का पत्रकारिता में आना एक मिशन था। उन्होंने शुरुआत से ही तय किया था कि कलम का इस्तेमाल कमजोर की आवाज बनने के लिए किया जाएगा। वर्षों की मेहनत और अनुभव के बाद आज वे एक प्रतिष्ठित समाचार मंच का नेतृत्व कर रहे हैं। संपादक की कुर्सी उनके लिए सिर्फ पद नहीं, बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदारी है।
ओम प्रकाश चौहान: शब्दों से समाज को दिशा देने वाले संपादक
the Bhaswar Times news
EDITOR Omprkash chouhan
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। इस स्तंभ को मजबूत और विश्वसनीय बनाने में जिन लोगों का योगदान है, उनमें *ओम प्रकाश चौहान* जी का नाम अग्रणी है। वे *"द भास्वर टाइम्स"* के संपादक हैं। "भास्वर" अर्थात तेजस्वी। ठीक इसी तरह उन्होंने अपनी निष्पक्ष पत्रकारिता से समाज में सत्य का प्रकाश फैलाया है।
ओम प्रकाश चौहान जी का पत्रकारिता में आना एक मिशन था। उन्होंने शुरुआत से ही तय किया था कि कलम का इस्तेमाल कमजोर की आवाज बनने के लिए किया जाएगा। वर्षों की मेहनत और अनुभव के बाद आज वे एक प्रतिष्ठित समाचार मंच का नेतृत्व कर रहे हैं। संपादक की कुर्सी उनके लिए सिर्फ पद नहीं, बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदारी है।
आज जब मीडिया पर व्यावसायिकता और सनसनी का दबाव बढ़ गया है, तब ओम प्रकाश चौहान जी ने निष्पक्षता को अपना धर्म बनाया है। "द भास्वर टाइम्स" की संपादकीय नीति बहुत स्पष्ट है - सच को सच कहना, चाहे सामने कोई भी हो। वे मानते हैं कि अखबार का काम केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना भी है।
उनकी प्राथमिकता हमेशा जनहित के मुद्दे रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान, मजदूर, महिला सशक्तिकरण, भ्रष्टाचार और ग्रामीण विकास जैसे विषयों को उन्होंने हमेशा प्रमुखता से उठाया है। उनकी कई रिपोर्टों और संपादकीय टिप्पणियों के बाद प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी और पीड़ितों को न्याय मिला। यही कारण है कि पाठकों के बीच "द भास्वर टाइम्स" की विश्वसनीयता लगातार बढ़ी है।
ओम प्रकाश चौहान जी युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वे अपनी टीम को हमेशा दो बातें सिखाते हैं। पहली, खबर लिखने से पहले तथ्यों की तीन बार जांच करो। दूसरी, खबर लिखते समय इंसानियत मत भूलो। उनके नेतृत्व में कई नए पत्रकार तैयार हुए हैं जो आज देश के अलग-अलग हिस्सों में जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं।
वर्तमान समय पत्रकारिता के लिए सबसे कठिन समय है। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज, राजनीतिक दबाव और आर्थिक चुनौतियां हर दिन सामने आती हैं। लेकिन इन सबके बीच ओम प्रकाश चौहान जी ने अपनी रीढ़ सीधी रखी है। उनका स्पष्ट मत है कि दबाव में आकर खबर बदल देना सबसे बड़ा पाप है। इसलिए "द भास्वर टाइम्स" आज भी अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ खड़ा है।
समाज के प्रति उनकी सोच केवल अखबार तक सीमित नहीं है। वे समय-समय पर रक्तदान शिविर, शिक्षा जागरूकता अभियान और पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक कार्यों में भी भाग लेते हैं। उनका मानना है कि एक जिम्मेदार संपादक का कर्तव्य सिर्फ लिखना नहीं, समाज के साथ खड़ा होना भी है।
ओम प्रकाश चौहान जी हमें यह याद दिलाते हैं कि पत्रकारिता कोई 9 से 5 की नौकरी नहीं है। यह एक तपस्या है। इसमें रातों की नींद, परिवार का समय और कई बार अपनी सुरक्षा भी दांव पर लगानी पड़ती है। लेकिन जो इस रास्ते को चुनता है, उसका मकसद पैसा नहीं, परिवर्तन होता है।
निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि ओम प्रकाश चौहान जी जैसे संपादक ही आज के दौर में पत्रकारिता की साख बचाए हुए हैं। "द भास्वर टाइम्स" के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि अगर नीयत साफ हो और शब्दों में दम हो, तो एक व्यक्ति भी सत्ता को आईना दिखा सकता है और समाज को नई दिशा दे सकता है।
आज देश को ऐसे ही संपादकों की जरूरत है जो जनता की गलियों से खबर लाएं, न कि केवल सत्ता के गलियारों से। ओम प्रकाश चौहान जी उसी परंपरा और जिम्मेदारी के सच्चे वाहक हैं।