863 मंदिरों की यात्रा के बाद पीपासर में हुआ राष्ट्रीय महासम्मेलन

863 मंदिरों की यात्रा के बाद पीपासर में हुआ राष्ट्रीय महासम्मेलन

863 मंदिरों की यात्रा के बाद पीपासर में हुआ राष्ट्रीय महासम्मेलन, 

1034 प्रतिभागियों ने दी जाम्भाणी संस्कार ज्ञान परीक्षा

जाम्भोजी की 575वीं जयंती पर चार दिवसीय आयोजन का समापन, 

प्रतिभाशाली बच्चों, महिलाओं व पुरुषों को नकदी देकर किया सम्मानित

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

नागौर। श्री जम्भेश्वर पर्यावरण एवं जीवरक्षा प्रदेश संस्था की ओर से जाम्भोजी भगवान की जन्मस्थली पीपासर में 1 से 4 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय महासम्मेलन का शुक्रवार को खुले अधिवेशन के साथ समापन हुआ। सम्मेलन का आयोजन जाम्भोजी भगवान के अवतार की 575वीं वर्षगांठ, 863 मंदिरों की यात्रा तथा एकवर्षीय हीरक जयंती एवं समाज सुधार अभियान के तहत किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एवं कार्यकर्ता पीपासर पहुंचे।

सम्मेलन के दौरान जाम्भाणी संस्कार ज्ञान परीक्षा में कुल 1034 विद्यार्थियों व लोगों ने भाग लिया। पहले दिन 629 छात्र-छात्राओं ने लिखित परीक्षा में 13 रचनाएं लिखीं। वहीं 18 वर्ष से कम तथा 10 वर्ष से कम आयु वर्ग के 30 बच्चों की मौखिक परीक्षा हुई। दूसरे दिन 321 बच्चों ने लिखित परीक्षा दी तथा 20 बच्चों ने मौखिक परीक्षा में भाग लिया। तीसरे दिन जाम्भेश्वर भगवान की शब्दवाणी सहित 14 रचनाएं कंठस्थ करने वाले बच्चों की मौखिक परीक्षा हुई, जिसमें नौ बच्चों ने भाग लिया। आठ वर्षीय प्रियांशी विश्नोई बनी जालोर जिले की टॉपर

14 रचनाओं की मौखिक परीक्षा में नौ बच्चों ने हिस्सा लिया, जिनमें सात छात्राएं और दो छात्र शामिल रहे। चयनित प्रतिभागियों को 5100 रुपये का पुरस्कार दिया गया। जालोर जिले के डूंगरी की आठ वर्षीय प्रियांशी विश्नोई राष्ट्रीय स्तर पर टॉप रही।

18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 25 लोगों ने परीक्षा दी, जिनमें 11 प्रतिभागियों ने नकदी इनामी स्थान प्राप्त किया। इनमें दो महिलाएं और नौ पुरुष शामिल रहे, जिन्हें 1100 रुपये का पुरस्कार दिया गया। 14 रचनाएं मौखिक रूप से सुनाने में महिलाओं में मूर्ति गोदारा, आरवा तथा पुरुषों में मुक्तिधाम मुकाम मंदिर के पुजारी रामकिशन पूनिया टॉप रहे। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव हासंगा सुभाष भांभू के नेतृत्व में बीस बच्चों ने भाग लिया । उक्त एक ही गांव के तीन बच्चे इकावन सौ इकावन सौ के पुरस्कार जीते इसलिए उक्त गांव राष्ट्रीय स्तर फर टॉप रहा। महाराष्ट्र से प्रवीण कुमार लोमरोड़ पांच बच्चों को लेकर आए वे सभी बच्चे परीक्षि में उत्तीर्ण रहे।

आचार्य स्वामी रामानन्दजी महाराज की आज्ञा से प्रदेश अध्यक्ष रामरतन बिश्नोई ने राष्ट्रीय सम्मेलन के मंच से घोषणा की कि आगामी

5 जून 2027 को देशभर के 863 मंदिरों पर एक साथ जांभाणी संस्कार ज्ञान की परीक्षा होगी जिसमें पांच लाख बच्चों का लक्ष्य रखा गया है।

शुक्रवार को आयोजित खुले अधिवेशन में परीक्षा में भाग लेने वाले सभी बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं-पुरुषों और भामाशाहों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। टॉप आने वाले प्रतिभागियों को नगद पुरस्कार, फूलों की माला, साफा और मोमेंटो प्रदान किए गए। संस्था के संरक्षक एवं मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी आचार्य रामानंद महाराज तथा संस्था के अध्यक्ष रामरतन बिश्नोई सहित पदाधिकारियों ने प्रतिभाओं को सम्मानित किया।

    खुले अधिवेशन में संस्था के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहनलाल कड़वासरा, आरवा ने संस्था की गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्री जम्भेश्वर पर्यावरण एवं जीवरक्षा प्रदेश संस्था का गठन 5 जून 2012 को हुआ था। संस्था से जुड़े कई कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और समाज सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

उन्होंने बताया कि संस्था के सचिव हिमताराम भांभू,नागौर *पद्मश्री पुरस्कार* से सम्मानित हैं, तथा अनिल धारणिया लखासर हनुमानगढ़ अर्थ हीरो एवं राजस्थान सरकार द्वारा *अमृता देवी बिश्नोई"पुरस्कार* से सम्मानित हो चुके हैं। 

संस्था द्वारा साको 363 हिंदी फीचर फिल्म बनाई गयी है जिसका ट्रेलर जारी हो चुका है और फिल्म का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

संस्था के सांस्कृतिक मंत्री रामगोपाल माल, बीकानेर के नेतृत्व में 18 जुलाई 2024 से पर्यावरण संघर्ष समिति के नाम से खेजड़ी बचाओ आंदोलन शुरू किया, जो लगातार जारी है।

*रेस्क्यू सेंटरों में वन्यजीवों की सेवा*

संस्था के प्रचार-प्रसार मंत्री दिलीप सिंवर, सूरतगढ़ ने संस्था की गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। सांचौर क्षेत्र के धमाणा में स्वर्गीय श्री रामलाल गुरु के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने करीब 6000 पेड़ लगाए और क्षेत्र में रेस्क्यू सेंटर की शुरुआत की गई।

जालोर जिला अध्यक्ष भंवरलाल मांजू ने टीम के साथ रेस्क्यू सेंटर की शुरुआत की, जहां वर्तमान में करीब 350 वन्यजीवों की सेवा की जा रही है। बाड़मेर जिले में जिला अध्यक्ष जयकिशन भादू के नेतृत्व में कातरला टीम ने वर्ष 2017 में रेस्क्यू सेंटर शुरू किया, जहां वर्तमान में करीब 125 वन्यजीवों की सेवा हो रही ।

     संस्था का तीसरा निजी मूकप्राणी रेस्क्यू सेंटर

श्रीबालाजी में प्राणीमित्र पूजा विश्नोई ने घायल वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वर्ष 2019 में रेस्क्यू सेंटर शुरू किया, जहां करीब 130 वन्यजीवों का संरक्षण किया जा रहा है। जैसलमेर में जिला अध्यक्ष सदराम खिलेरी के नेतृत्व में टीम शिकार की घटनाओं और पेड़ों की कटाई रोकने के लिए लगातार सक्रिय है।

महिला सम्मेलन में भी समाज सुधार और धर्म पर चर्चा

चार दिवसीय कार्यक्रम में संस्था के विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण और समाज सुधार को लेकर सुझाव रखे। महिला सम्मेलन में मूर्ति गोदारा, आरवा तथा द्रोपदी जाखड़, नोखा ने धार्मिक एवं सामाजिक विषयों पर सुझाव रखे और बेहतर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में हनुमानगढ़ जिला अध्यक्ष मनोहरलाल कङवासरा ने मंच संचालन किया। वहीं भानूसिंह सियाग, अनोपराम डूडी, जेपी सियाग नागौर, शिवकेलाश धारणिया डूंगरगढ़, महिराम दिलोईया जिलाध्यक्ष बीकानेर सहित संस्था के अनेक कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन में भाग लेकर समाज सुधार एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने विचार रखे।एक वर्ष की धर्मरथ यात्रा का रथ भामाशाह फगलूराम ईसरवाल ने दिया जो अखिल भारतीय विश्नोई महासभा के जिला अध्यक्ष पाली है।

*भामाशाहों ने किया सहयोग*

चार दिवसीय सम्मेलन के खुले अधिवेशन में भोजन सहित कार्यक्रम के विभिन्न खर्चों में मोहनराम पुत्र फूलाराम भादू परिवार की ओर से सहयोग किया गया। वहीं मानाराम खिलेरी, सांकड़-सांचौर की ओर से परीक्षा में शामिल बच्चों के लिए पेन एवं कॉपियों की व्यवस्था में सहयोग दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य स्वामी रामानंद महाराज मौजूद रहे। 863 मंदिरों की यात्रा के संयोजक रामरतन बिश्नोई सहित संस्था के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पीपासर के महंत स्वामी भक्ति स्वरूप महाराज, धवा के महंत लालदास महाराज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाज के लोग सम्मेलन में शामिल हुए।

जन्माष्टमी की रात जागरण का भी आयोजन हुआ। चार दिन तक चले इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जाम्भाणी संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, जीव रक्षा, नशामुक्ति और समाज सुधार का संदेश दिया गया।