राज्यसभा में निर्विरोध चयन से निखरी नीरज डांगी की राजनीतिक प्रतिष्ठा
Om Prakash editor
राज्यसभा में निर्विरोध चयन से निखरी
नीरज डांगी की राजनीतिक प्रतिष्ठा
The Bhaswar times
पिता दिनेश डांगी की तरह आलाकमान के करीबी और जनता से गहरा जुड़ाव
Niranjan Parihar
-विशेष संवाददाता-जयपुर। राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी सहित बीजेपी के डॉ सतीश पूनिया और डॉ अलका गुर्जर का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। लेकिन दूसरी बार राज्यसभा में जा रहे नीरज डांगी का निर्विरोध चुने जाने का यह घटनाक्रम केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि उस राजनीतिक विरासत की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी मजबूत नींव उनके पिता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश राय डांगी ने रखी थी। राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इस बात की विशेष चर्चा है कि जिस तरह दिनेश राय डांगी 1972 में अपने दूसरे विधानसभा चुनाव में, देसूरी क्षेत्र से निर्विरोध निर्वाचित होकर प्रदेश की राजनीति में अलग पहचान बनाने में सफल रहे थे, उसी प्रकार उनके पुत्र नीरज डांगी भी अपने दूसरे चुनाव में निर्विरोध राज्यसभा पहुंचकर पिता की राजनीतिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

दिनेश राय डांगी देसूरी से तीन बार विधायक रहे और दूसरा चुनाव सन 1972 में निर्विरोध जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। नीरज डांगी का भी दूसरा राज्यसभा चुनाव निर्विरोध होने जा रहा है। पिता दिनेश राय डांगी कांग्रेस में गांधी परिवार के विश्वसनीय नेताओं में गिने जाते थे, और यही विश्वास की परंपरा नीरज डांगी तक पहुंची है। राज्यसभा सांसद के रूप में उनकी राजनीतिक सक्रियता और विषयों की समझ उन्हें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीब ले गई और गांधी परिवार के साथ उनके अच्छे संबंध विकसित हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का उन पर विशेष भरोसा बढ़ा और दिग्गज नेता अशोक गहलोत के साथ उनकी दशकों की निकटता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। कांग्रेस नेतृत्व में नीरज की स्वीकार्यता का दायरा लगातार बढ़ा है।
राजनीति के समीक्षकों का मानना है कि नीरज डांगी के व्यक्तित्व में उनके पिता की राजनीतिक शैली की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते है कि कांग्रेस में नीरज डांगी को अब केवल राजस्थान के नेता के रूप में नहीं, बल्कि पार्टी के उभरते राष्ट्रीय चेहरों में देखा जा रहा है। परिहार के अनुसार कांग्रेस में ऐसे कई वरिष्ठ नेता हैं जो लंबे समय से राजनीतिक सक्रियता के अवसर की प्रतीक्षा में हैं। ऐसे माहौल में लगातार दूसरी बार नीरज डांगी को राज्यसभा भेजे जाने का राहुल गांधी का निर्णय इस बात का संकेत है कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें पार्टी की भविष्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संभावना के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेसी राजनीति की गहरी समझ रखने वाले देश के वरिष्ठ पत्रकार पंकज शर्मा का भी मानना है कि राजस्थान कांग्रेस के भीतर बदलते शक्ति संतुलन के दौर में नीरज डांगी का लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचना उनकी व्यक्तिगत स्वीकार्यता, संगठनात्मक उपयोगिता और शीर्ष नेतृत्व के भरोसे का प्रमाण है। निर्विरोध निर्वाचन ने न केवल उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को नया आयाम दिया है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें आने वाले वर्षों में बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार कर रहा है।

राजनीतिक हलकों में नीरज डांगी की पहचान उनके पिता की तरह ही केवल एक संगठनात्मक नेता के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में बनी है जो हर राजनीतिक और सामाजिक विषय पर गहरी समझ रखते हैं। कार्यकर्ताओं से उनका आत्मीय जुड़ाव, समर्थकों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार और सामाजिक सरोकारों में सक्रिय भागीदारी उन्हें कांग्रेस की नई पीढ़ी के नेताओं में अलग स्थान दिलाती है। पिता के पथ पर अग्रसर होकर नीरज डांगी विश्वास की विरासत को विकसित करने वाले नेता माने जा रहे हैं। इस प्रकार, दिनेश राय डांगी से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा अब नीरज डांगी के नेतृत्व में नए विस्तार की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां विरासत के साथ व्यक्तिगत क्षमता और संगठनात्मक प्रतिबद्धता भी उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।