केंद्रीय मंत्री के बिगड़े बोल इनके सत्ता के अहंकार प्रतीक-मनीषा पंवार
केंद्रीय मंत्री के बिगड़े बोल इनके सत्ता के अहंकार प्रतीक-मनीषा पंवार
जोधपुर। सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा अधिकारियों के प्रति दिया गया बयान अत्यंत आपत्तिजनक एवं चिंताजनक है। अधिकारियों, जो कि एक संवैधानिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं, के संदर्भ में “जिंदगी खराब करना” और “नौकरी खराब करना” जैसे शब्दों का प्रयोग खुली धमकी के रूप में देखा जा सकता है। यह किसी भी प्रकार से संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
यह बयान दर्शाता है कि मंत्री महोदय अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में हताशा प्रकट कर रहे हैं। प्रशासनिक कार्यों का समाधान प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार तथा संवैधानिक विषयों का निपटारा संवैधानिक ढांचे के भीतर ही किया जाना चाहिए। “बदतमीजी के डबल बदतमीजी” जैसी भाषा का प्रयोग इस प्रकार प्रतीत होता है मानो कोई सार्वजनिक मंच नहीं, बल्कि गली-मोहल्ले का विवाद हो।
सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे अधिकारियों एवं प्रशासनिक तंत्र के साथ संयमित एवं मर्यादित व्यवहार रखें और प्रशासनिक माध्यमों से ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें। केवल किसी एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की समस्याओं तक सीमित रहने के बजाय आमजन—किसान, गरीब, मजदूर एवं अन्य जरूरतमंद लोगों—के लंबित कार्यों के समाधान हेतु ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत की जानी चाहिए थी।
इस प्रकार के बयान समस्या के समाधान के बजाय केवल क्षणिक लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास प्रतीत होते हैं।
लोकतंत्र में सभी संस्थाओं—चाहे वह कार्यपालिका हो या विधायिका—का सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। हमारी सामूहिक भावना यही है कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति प्रशासनिक स्तर पर बाधित न हो, बल्कि उसका कार्य सरलता एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण हो। माननीय मंत्री जी को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए जिससे आमजन को राहत मिले और किसी की भी गरिमा आहत न हो।