संगीतमय राम लीला केवट ने श्री राम को नाव से गंगा पार कराई

संगीतमय राम लीला केवट ने श्री राम को नाव से गंगा पार कराई

संगीतमय राम लीला केवट ने श्री राम को नाव से गंगा पार कराई

पाली। श्री रामलीला कमेटी की ओर से चल रही संगीतमय रामलीला के चौथे दिन रामलीला मैदान में दर्शकों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीराम वंदना से हुआ।
प्रवक्ता मांगुसिंह दुदावत ने बताया कि प्रथम दृश्य में राजा दशरथ का निधन गीत “भूल गये हो क्यों राजेश्वर श्रवण की अंतिम घटना…” पर अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शक भावुक हो उठे। इसके बाद केवट प्रसंग को भक्ति और आस्था से जोड़कर आकर्षक रूप में मंचित किया गया।
भरत मिलन व खड़ाऊं प्रसंग ने उपस्थित जनसमूह की आंखें नम कर दीं। पंचवटी प्रसंग में शूर्पणखा ने अपनी नटखट अदाओं और नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया, किंतु सीता पर आक्रमण का प्रयास करने पर लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी। तत्पश्चात खर-दूषण वध का युद्ध दृश्य रोमांचक रहा।
अंतिम दृश्य में रावण के रूप में जीवराज चौहान ने अपनी दमदार अदाकारी से समां बांध दिया और सीता हरण का निश्चय कर दर्शकों को अगले दिन के मंचन की प्रतीक्षा में छोड़ दिया।


इस नाट्यमंचन में जीवराज चौहान, घनश्याम भाटी, ज्ञानचंद राठौड़, लक्की खान, रोहित शर्मा, गोविंद गोयल, महेंद्र बडगोती, कंचन दांसानी, खुशबू शर्मा, पिंकी, जया जोशी, रूपाली जोशी सहित अनेक कलाकारों ने भाग लिया। निर्देशन हरिचरण वैष्णव, सह-निर्देशन गणेश परिहार तथा संगीत दिगंबर व्यास व नैहा देवड़ा, हर्षवर्धना भाटी की टीम ने रगंजमाया  
कार्यक्रम में अतिथि रूप में विप्र फाउंडेशन से प्रदीप दवे, दिलीप दवे, शिवप्रसाद दायमा, हर्षवंश, अंकिता बोहरा, पुजा ओझा, शरद ओझा, पंडित विशाल, जय शंकर हरिमोहन शर्मा समाजसेवी  सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे, जिनका दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया गया।