स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन आफ इंडिया ब्यावर द्वारा इफ्तार पार्टी कार्यक्रम आयोजित
स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन आफ इंडिया ब्यावर द्वारा इफ्तार पार्टी कार्यक्रम आयोजित
रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही

ब्यावर। स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन आफ इंडिया ब्यावर यूनिट की जानिब से करबला मार्ग ब्यावर में एक इफ्तार पार्टी कार्यक्रम आयोजन किया गया इस मौके पर मेहबूब खान पूर्व अध्यक्ष एस, आई, ओ ,ब्यावर यूनिट ने माह रमजानुल मुबारक की फ़ज़ीलत पर अपनी बातें रखते हुए कहा कि रोज़ा भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है । रोज़े की हालत में सभी बुराईयों बचे रहने का नाम ही असल रोज़ा है। और रोज़े के जरिए यह भी अहसास कराया जाता है कि गरीबी या परेशानी किया होती है। इसी से गरीबों, विधवाओं, यतीमों व बेसहारा लोगों की मदद का जज्बा भी पैदा होता है । इसलिए आपने देखा होगा हर मुसलमान इस माह में ज्यादा से ज्यादा जकात,सदका व खैरात निकालते हैं। और इस बाबरकत माह में सभी नेकियों का अज्रो सवाब बढ़ा दिया जाता है। जैसे नवाफिल का अज्र-सवाब फर्जों के बराबर और फ़र्ज़ो का अज्र-सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है। और अल्लाह तआला ने फ़रमाया रोज़ा मेरे लिए में जितना चाहूंगा इसका बदला दूंगा। और हज़रत मुहम्मद सल्ल का फरमान है कि जन्नत (स्वर्ग) में जाने के कई दरवाजे हैं। लेकिन रोजेदारों के लिए एक खास दरवाजा है। जिसका नाम रयान है उस दरवाजे से केवल रोजेदार ही दाखिल होंगे।

इस मौके पर कहा कि रमजान माह के तीन असरे होते हैं। एक रहमत का दूसरा मगफेरत का और तीसरा जहन्नुम से छुटकारा पाने का तो दो असरे तो गुज़र चुके हैं। अब यह आखरी असरा बचा है। इस आखरी असरे की हैमियत यह भी है कि इस असरे में लैलुतुलकदर की रात भी है जो हजार महिनों से ज्यादा है जिसने इस असरे में रातों को जगकर इबादत की और इस रात को पाया तो हजार महिनों का अज्रो सवाब पायेगा। इस मौके पर मुमताज़ अली सहसचिव जमाअते इस्लामी हिन्द, ज़िला -अजमेर, ब्यावर व राजसमन्द ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर कई गणमान्य लोग मौजूद थे। दुआ के साथ सभी ने रोज़ा इफ्तार व खाना खाया व नमाज़ पढ़ी। इसी के साथ इस कार्यक्रम का समापन हुआ।
