सर्वोच्च न्यायालय का राजस्थानी हित निर्णय सराहनीय - कविया एवं पहाड़िया
सर्वोच्च न्यायालय का राजस्थानी हित निर्णय सराहनीय - कविया एवं पहाड़िया
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
डेह/नागौर।- अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के संस्थापक एवं राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मण दान कविया एवं प्रदेश महामंत्री पवन पहाड़िया ने सर्वोच्च न्यायालय की ओर से राजस्थानी भाषा के हित में दिये गए निर्णय की सराहना करते हुए इसे प्रदेश हित में होने की बात कही है। कविया ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत को लिखे आभार पत्र में लिखा कि राजस्थानी भाषा राजस्थान प्रदेश की प्रतीक एवं 16 करोड़ नागरिकों की मातृभाषा है।इसकी लोककथाएं, लोकगीत विश्वपटल पर अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। इसका विशाल शब्दकोष में जिसमें ऊंट पशु के 120 पर्यायवाची है। हिन्दी भाषा को समृद्ध बनाने में राजस्थानियों ने अपनी मातृभाषा की कुर्बानी दी थी। भाषाई मान्यता के मापदंड सही नहीं होने के कारण देश की आजादी के बाद भी आज तक विश्व की तेरहवीं एवं भारत की तीसरी समृद्ध राजस्थानी भाषा कानूनी मान्यता की मोहताज बनी हुई है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (2020)के निर्णय के बावजूद भी प्रदेश में राजस्थानी भाषा को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने का निर्णय ईमानदारी के साथ लागू नहीं किया है जिसकी बदौलत प्रदेशवासियों ने न्यायालय की शरण ली। कविया ने स्मरण दिलाते हुए लिखा कि 40 वर्ष पूर्व नागौर से ही राजस्थानी आंदोलन शुरू कर इसे जन आंदोलन बनाया गया है।प्रदेश महामंत्री पवन पहाड़िया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में पदम मेहता व अन्य की याचिका जिसमें राज्य की शिक्षा व्यवस्था व रीट में राजस्थानी भाषा को शामिल करने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रमनाथ व संदीप मेहता,पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी व अधिवक्ता अपूर्व सिंघवी सहित खंडपीठ की संपूर्ण टीम के निर्णय की भरपूर सराहना की है। पहाड़िया ने कहा कि कोर्ट में इन्होंने राजस्थानी हित के संबंध में कहा कि बौद्धिक और साहित्यिक विकास के लिए यह महत्वपूर्ण फैसला जरूरी बताया साथ ही राजस्थानी के समृद्ध साहित्य और सांस्कृतिक इतिहास की जिक्र भी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजस्थानी भाषा पहले ही कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है जबकि स्कूलों में केवल आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को ही पढ़ाया जा रहा है। न्यायालय के निर्णय पर आभार प्रकट करते हुए गजादान चारण, प्रहलाद सिंह झोरड़ा,सतपाल सिंह, सुखदेव सिंह, सांवलदान कविया,भंवर ववैष्णव,मेहराम धोलिया, मीठुराम ढाका, राजेंद्रकृष्ण फौजी, शिवशंकर व्यास , महेंद्रसिंह सहित राजस्थानी शुभचिंतकों ने खुशी जाहिर की है।