युवतियों को रातभर थाने में रखने का मामला*

युवतियों को रातभर थाने में रखने का मामला*

युवतियों को रातभर थाने में रखने का मामला*

 जोधपुर / युवतियों को रातभर थाने में रखने के मामला  में हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बाद सीबीआई ने केस को पूरी तरह  टेक ओवर किया हैं।

युवतियों को अवैध रूप से रातभर थाने में बंद रखने के मामले में बड़ी कार्रवाई होगी।

मामले में संबंधित थानाधिकारी और उपनिरीक्षक की भूमिका की  गहन जांच के साथ 

आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा हैं।

थाने के सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर डिलीट किए जाने की बात सामने आई हैं।

पुलिसकर्मियों द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने को लेकर कोर्ट ने जताई नाराजगी, 

सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर पड़ताल शुरू की 

घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और रिकॉर्ड को कब्जे में लेगी केंद्रीय जांच एजेंसी, 

मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों और मददगारों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

पीड़ित युवतियों को न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट ने पूरे मामले को सीबीआई को सौंपा गया हैं।केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कुड़ी भगतासनी पुलिस थाने में युवतियों को बिना एफआईआर के अवैध रूप से हिरासत में रखने तथा सबूत मिटाने के आरोपों में कार्रवाई करते हुए तत्कालीन थानाधिकारी राजेंद्र चौधरी, SI शिमला जाट और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

 मामला 15 जनवरी 2025 की पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है जब कुड़ी भगतासनी पुलिस ने सेक्टर-9 स्थित एक निवास पर 'पावर ब्रेक डाउन सर्विस इंडिया' और 'सॉल्यूशन ब्रेकडाउन सर्विस टू इंडिया' नामक कथित कॉल-सेंटर पर छापा मारने का दावा किया था।

पुलिस ने कहा कि वहाँ से वाहन सर्विस के नाम पर लोगों को धोखाधड़ी की जा रही थी और 12 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिनमें 10 युवतियाँ भी शामिल थीं। पुलिस ने 16 जनवरी 2025 को औपचारिक रूप से FIR दर्ज की थी।

युवतियों ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि उन्हें 15 जनवरी की शाम उनके घरों से उठा लिया गया था और बिना किसी शिकायत या FIR के रात भर थाने में हिरासत में रखा गया।

युवतियों को रातभर थाने में रखने का मामला*

 जोधपुर / युवतियों को रातभर थाने में रखने के मामला  में हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बाद सीबीआई ने केस को पूरी तरह  टेक ओवर किया हैं।
युवतियों को अवैध रूप से रातभर थाने में बंद रखने के मामले में बड़ी कार्रवाई होगी।
मामले में संबंधित थानाधिकारी और उपनिरीक्षक की भूमिका की  गहन जांच के साथ 
आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा हैं।
थाने के सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर डिलीट किए जाने की बात सामने आई हैं।
पुलिसकर्मियों द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने को लेकर कोर्ट ने जताई नाराजगी, 
सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर पड़ताल शुरू की 
घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और रिकॉर्ड को कब्जे में लेगी केंद्रीय जांच एजेंसी, 
मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों और मददगारों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
पीड़ित युवतियों को न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट ने पूरे मामले को सीबीआई को सौंपा गया हैं।केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कुड़ी भगतासनी पुलिस थाने में युवतियों को बिना एफआईआर के अवैध रूप से हिरासत में रखने तथा सबूत मिटाने के आरोपों में कार्रवाई करते हुए तत्कालीन थानाधिकारी राजेंद्र चौधरी, SI शिमला जाट और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

 मामला 15 जनवरी 2025 की पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है जब कुड़ी भगतासनी पुलिस ने सेक्टर-9 स्थित एक निवास पर 'पावर ब्रेक डाउन सर्विस इंडिया' और 'सॉल्यूशन ब्रेकडाउन सर्विस टू इंडिया' नामक कथित कॉल-सेंटर पर छापा मारने का दावा किया था।

पुलिस ने कहा कि वहाँ से वाहन सर्विस के नाम पर लोगों को धोखाधड़ी की जा रही थी और 12 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिनमें 10 युवतियाँ भी शामिल थीं। पुलिस ने 16 जनवरी 2025 को औपचारिक रूप से FIR दर्ज की थी।

युवतियों ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि उन्हें 15 जनवरी की शाम उनके घरों से उठा लिया गया था और बिना किसी शिकायत या FIR के रात भर थाने में हिरासत में रखा गया।