बेकाल ओरण मे 1 मई 2026 को होगा पीपल की शादी समारोह का आयोजन 

बेकाल ओरण मे 1 मई 2026 को होगा पीपल की शादी समारोह का आयोजन 

बेकाल ओरण मे 1 मई 2026 को होगा पीपल की शादी समारोह का आयोजन 

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

नागौर। सिंगड बेकाल धौरा के नीचे बेकाल ओरण नागौर मे पीपल के पेड़ की शादी ग्रामीण वासियों ने  सामूहिक  रूप से मिलकर 1 मई 2026 को सुबह सवा सात बजे करने का आयोजन किया जा रहा है। पीपल की शादी समारोह की जानकारी दुदाराम भांभू सिंगड ने दी और संतों को आमंत्रित किया है। यह आयोजन पर्यावरण प्रेमी महन्त डॉ नानक दास जी महाराज के पावन सानिध्य में यह विशाल वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 
पेड़ पौधे पर्यावरण रक्षा के क्षेत्र में पूरे भारत में पद्मश्री हिम्मताराम भांभू ने नागौर का मान सम्मान बढ़ाया। जो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं लोगों को प्रेरणा मिलती है।

आपको बता दें कि 
राजस्थान में पीपल (अक्सर पीपल-पीपली या पीपल-बरगद) का विवाह एक अनूठी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय परंपरा है, जो आमतौर पर पीपल पूर्णिमा या वैशाख माह में होती है। यह एक प्रतीकात्मक विवाह है जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार, कार्ड निमंत्रण, हल्दी-मेहंदी, बैंड-बाजे और बारातियों के साथ पूरी रस्में निभाई जाती हैं। 

राजस्थान में पीपल विवाह की मुख्य बातें उद्देश्य: 

पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना और पेड़ों को सांस और जीवन के रक्षक के रूप में सम्मानित करना।

प्रक्रिया: पीपल के पेड़ को दुल्हन और अक्सर बड़ (बरगद) के पेड़ को दूल्हा माना जाता है, जिन्हें सजाकर, साड़ी पहनाकर विवाह कराया जाता है।

स्थान: यह परंपरा राजस्थान के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्र जिसमें नागौर जिले का सिंगड गांव 

रस्में: इस विवाह में लगन, हल्दी-मेहंदी, तोरण, सात फेरे, कन्यादान, और प्रीतिभोज जैसी सभी रस्में पारंपरिक तरीके से की जाती हैं।

मान्यता: माना जाता है कि पीपल को अविवाहित रखना अशुभ होता है, इसलिए उनका विवाह करना पुण्यदायी होता है। 

इस अनूठी शादी के के माध्यम से, ग्रामीण लोग प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा और जिम्मेदारी निभाते हैं, जहाँ पूरे गांव के लोग मिलकर भाग लेते हैं।
पिछले साल चोमासा में जब बरसात नहीं हो रही थी फसल सुख रही थी सबके चेहरे पर निराशा थी फिर भी पूरे गांव के लोग इकट्ठे होकर बेकाल धौरा के नीचे बेकाल नाडा की पाल  पर बैठकर इंद्रमेघ महायज्ञ पुज्य गुरुदेव नानक दास जी महाराज के उपस्थित में करवाया था और फिर तो भारी बारिश से पुरा तलाब भर गया था लोगों की आस्था है विश्वास है पर्यावरण के प्रति और ईश्वर के प्रति भगत की बात भगवान जरूर सुनता है और उनका काम भी करता है यह आज भी प्रमाणिक है।