महाराज ने किए पाली में देव दर्शन

महाराज ने किए पाली में देव दर्शन

कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी  महाराज ने किए पाली में देव दर्शन

पाली। कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने 9 दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव के सानन्द पूर्ण होने के पश्चात पाली के प्राचीनतम मंदिरों में देवदर्शन किये। 

गुरुदेव प्राचीन सोमनाथ मंदिर पहुंचे जहां अपार जनसमुदाय ने पुष्प वर्षा कर गुरुदेव का भावभीना स्वागत किया। गुरुदेव ने सोमनाथजी के दर्शन कर आरती और पूजा की। श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। इसके पश्चात गणेश मंदिर, गोड़ी पार्श्वनाथ में दर्शन किये और पुष्प अर्पित किए। 

जगदगुरुदेव नागा बाबा की बगीची गणेश मंदिर पहुंचे जहां गुरुदेव ने पूजा अर्चना की। यहां नागा बाबा बगीची के प्रमुख सुरेश गिरी ने जगद्गुरू देव का अभिनंदन किया। इसके बाद गुरुदेव ने नवलखा पार्श्वनाथ मंदिर के दर्शन किये। सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ ने गुरुदेव की जयजयकार की और दर्शन लाभ लिया। 

जिससे ईर्ष्या हो उसका भला सोच लो, बहुत आगे बढ़ जाओगे- जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी जी

– जगद्गुरूदेव से बिछुड़ते भक्तों की अश्रुधारा बह निकली

– माता-पिता का स्मरण कर गला रुंध आया जगद्गुरू देव का

पाली शहर के अणुव्रत नगर ग्राउंड पर ऐतिहासिक आध्यात्मिक महोत्सव के समापन का दृश्य बेहद करूणामयी था। पांडाल भीतर से बाहर तक खचाखच भरा था।कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरि महाराज से बिछोह के पलों में श्रद्धालू भावुक हो गए। जगद्गुरू ने विदा ले रहे भक्तों से मुस्कुराते हुए खुशी खुशी जाने को कहा तो श्रद्धालू और अधिक भावुक हो गए।

गुरूदेव ने अंतिम दिवस के प्रवचन में श्रद्धालुओं से कहा कि जिससे भी आपको ईर्ष्या होती हो, उसके बारे में मन मे सोचें कि भगवान इसका भला करे। ऐसा करते हुए आप न केवल ईर्ष्या और द्वेष पर विजय पा लेंगे बल्कि आपकी समृद्धि का चमत्कारिक रास्ता भी खुलेगा। दूसरों की प्रगति देखकर खुशी मन से महसूस कीजिये। यह बुराई को छोड़ने का उपयोगी उपाय है। 

गुरुदेव ने कहा आप समृद्ध हैं और चार जरूरतमंदों को भोजन न करा सकते हों तो यह समृद्धि किसी काम की नहीं। धन एक वस्तु है जीवन मे कभी भी वस्तु की लालसा न करें जब आप धन आने पर उसे खर्च करना सीख जाएंगे तो आपकी समृद्धि के द्वार खुलते जाएंगे। व्यक्ति का संसार मे कोई दुश्मन नहीं होता, बल्कि कर्म ही उसका दुश्मन होता है। गुरूदेव ने अर्द्ध रात्रि के अभिजात्य मुहूर्त समय पर आकाश भैरव मंत्रोच्चार कर सम्पूर्ण पाली और अंचल वासियों के सुख समृद्धि की कामना करते हुए आशीर्वाद दिया। 

*मां-पिता का स्मरण कर गला रुंध आया गुरुदेव का–*

जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कलश यात्रा में जब वे पाली की गलियों से गुजरे तो माता पिता का स्वतः स्मरण हो आया। गुरुदेव ने कहा मेरे माता पिता इसी पाली क्षेत्र के थे जो अपने बचपन में इन्हीं गलियों में खेलते दौड़ते थे। माता पिता अब नहीं हैं। लेकिन उनके पैरों से स्पर्श हुई मिट्टी के कण आज इन गलियों में मुझे आशीर्वाद दे रहे थे। माता पिता भी ऊपर से देखकर अपने बेटे को अपनी मिट्टी देख कितना खुश हुए होंगे। गुरूदेव ने श्रद्धालुओं से कहा अपनी मिट्टी के लिये हमेशा सद्कार्य करते रहिए। मां-बाप और मिट्टी का कर्ज चुकाने की क्षमता किसी मे नहीं होती फिर भी जो कुछ बन सके जरूर करना चाहिए। गुरुदेव ने कथा विश्रांति पर एक से बढ़कर एक कर्णप्रिय भजन सुनाए श्रद्धालू और खासकर महिलाएं इन भजनों पर जमकर थिरकी। 

*गुरुदेव ने गुरुदक्षिणा में आई श्रद्धा निधि की पोटली रोटी बैंक को भेंट की–*

पाली नगर में एक और इतिहास बना है। वह यह कि एक ही समय एक साथ हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज से दीक्षा ग्रहण की। गुरूदेव कभी भी गुरुदक्षिणा में धनराशि स्वीकार नहीं करते। आप श्री ने घोषणा की थी कि फिर भी जो श्रद्धालू गुरुदक्षिणा भेंट करना चाहते हैं वह राशि मूक प्राणियों की सेवा के लिए संचालित रोटी बैंक को भेंट की जाएगी। इसमें नगदी और ऑनलाइन कुल राशि 2 लाख 58 हजार 852 रुपये प्राप्त हुए। गुरुदक्षिणा में प्राप्त समूची श्रद्धा निधि की पोटली जगद्गुरू द्वारा रोटी बैंक के प्रतिनिधि के तौर पर लादूराम लोढ़ा को भेंट कर दी गई।