इश्क का दस्तूर निराला
इश्क का दस्तूर निराला
THE BHASWAR TIMES
BY:-ANJU JANGID RADHE
इश्क का दस्तूर निराला
दूर रहकर भी वह करीब,,
पराया कर देता खुद से
प्रेमी बन जाता है हबीब।।
नजरो का आत्मसात है
दस्तूर बस दिल का होता,,
इश्क की बाजी सब लगाते
जीतता जो बिरला होता।।
मुहब्बत में नैनो के खेल
की समझ जाएं जो भाषा,,
राधामाधव जैसी प्रीत की
समझता हर कोई परिभाषा।।