प्यार और उल्लास का पर्व दिवाली,

प्यार और उल्लास का पर्व दिवाली,

कविता- प्यार और उल्लास का पर्व दिवाली,

प्यार और उल्लास का पर्व दिवाली,

ख़ुशियों के त्योहार का पर्व दिवाली।

राम अयोध्या आगमन, ख़ुशी मनायें,

तम मिटाने का अवसर पर्व दिवाली।

नयी फ़सलों का पर्व किसान खुश है,

ख़ुशहाल राष्ट्र जन जन, पर्व दिवाली।

समुद्र मंथन से माँ लक्ष्मी प्रकटीकरण,

लक्ष्मी माँ के स्वागत का पर्व दिवाली।

नरकासुर से राजकन्याओं की मुक्ति,

सुभद्रा की सामर्थ्य का पर्व दिवाली।

दैत्य राज बालि पर वामन की विजय,

महावीर की ऐहिक लीला पर्व दिवाली।

विश्व पटल पर मने दिवाली दीप जलें,

तम मिट जाये चहुंओर, है पर्व दिवाली।

अमावस्या का गहन तम भी विचलित है,

पूर्णिमा का अहसास कराता पर्व दिवाली।

प्रत्येक वर्ग खुश आज, धन धान्य की वर्षा,

शरद ऋतु का स्वागत करता पर्व दिवाली।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन