ग़ज़ल- मुस्कुराते हुए लोगो से मिला करते हैं

ग़ज़ल- मुस्कुराते हुए लोगो से मिला करते हैं

ग़ज़ल- मुस्कुराते हुए लोगो से मिला करते हैं

ज़िन्दगी शान से हम लोग जिया करते हैं

आगे दुनिया के कभी हम न झुका करते हैं

ज़ुल्मते-शब के अंधेरों को मिटाने के लिए

इल्म के दीप जलाते हैं, ज़िया करते हैं

ग़म छुपाए हुए रहते हैं सदा सीने में 

मुस्कुराते हुए लोगो से मिला करते हैं

दोस्तों के लिए दे देते हैं हम जां अपनी

दुश्मनों के लिए भी दिल से दुआ करते हैं

ज़िक्र मौला का किया करते हैं हम लोग सदा

काम जब भी कोई दुनिया में नया करते हैं

हम तो उम्मीदे-वफ़ा दुनिया से रखते ही नहीं

अपने हाथों से ही ज़ख़्मों को हवा करते हैं

हमने सीखा है नबी जी से यही तो हरदम

जब भी मौक़ा मिले दुनिया का भला करते हैं

आरज़ू अब नहीं जीने की रही है बाक़ी

'सांस लेने की फ़क़त रस्म अदा करते हैं'

अपने अख़लाक़ के मे'यार की ख़ातिर 'क़ासिम'

अपने किरदार से हर्गिज़ न गिरा करते हैं

सिर्फ़ इबादत ही नहीं करते ख़ुदा की 'क़ासिम'

ख़िदमते-ख़ल्क़ भी हम लोग किया करते हैं

000

क़ासिम बीकानेरी

मदीना मस्जिद के सामने

मोहल्ला भिश्तियान

बीकानेर (राजस्थान)334001

मो.न. 8561814522