सरकार भाषा एवं साहित्य के प्रति उदासीनता बरत रही है - कविया
सरकार भाषा एवं साहित्य के प्रति उदासीनता बरत रही है - कविया
रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार पवन पहाड़िया
मूंडवा - अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के संस्थापक एवं राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मण दान कविया ने प्रदेश में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर भाषा एवं साहित्य के प्रति सरकार की उदासीनता पर रोष प्रकट किया है। कविया ने बयान जारी कर कहा कि प्रदेश में भाजपा को सत्ता में आये हुए दो वर्ष पूरे हो गये लेकिन साहित्य एवं राजस्थानी भाषा के प्रति सरकार की उदासीनता बरकरार है। सत्ता में आते ही सरकारों की आदत अनुसार प्रदेश में भाजपा सरकार ने आठों साहित्यिक अकादमियां भंग कर दी थी जिनकी सुध आज तक नहीं ली गई है। प्रदेश में साहित्यिक शून्यता फैली हुई है। प्रदेश के साहित्यकार सरकार के इस रवैये से मौन धारे चिंतित नजर आ रहे हैं। अकादमियां की पत्रिकाएं बंद पड़ी है। साहित्यकारों को दिये जाने वाले प्रति वर्ष के पुरस्कार, पांडुलिपि सहयोग,पोथी प्रकाशन सहयोग सब ठप्प पड़े हैं। न तो साहित्यिक सेमीनार सम्मेलन गोष्ठियां हो रही है न ही सरकार इस ओर कोई ध्यान दे रही है। कविया ने कहा कि सरकार उपलब्धियों की बड़ी बड़ी डींगे हांक रही है लेकिन धरातल पर ऐसा कोई चमत्कारिक परिवर्तन नहीं दिख रहा है जो आमजन को संतुष्ट कर सके। चारों तरफ अव्यवस्था, चोरी,ठगी,अपराध,नशा प्रवृत्ति अखबारों में पढ़ने को मिल रहे हैं। प्रदेश के साहित्यकार कर्जा लेकर किताबें छपा रहे हैं। मां सरस्वती के भंडार में पेट काट काट श्रीवृद्धि कर रहे हैं ।जो सरकार साहित्यकारों एवं पत्रकारों के प्रति उदासीन हो उसे लोक कल्याणकारी सरकार की संज्ञा नहीं दी जा सकती। कविया ने अपनी मातृभाषा राजस्थानी के प्रति पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार ने प्रदेश की पहचान राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए कोई कदम नहीं बढ़ायें है। जनता की नासमझी एवं नेताओं की उदासीनता अपनी मातृभाषा राजस्थानी को कानूनी मान्यता का सम्मान दिलाने में गहरी रूचि नहीं ले रहे हैं। मीडिया के सहयोग के बाद भी राजस्थानी भाषा प्रदेश में 7 करोड़ लोगों की मातृभाषा होने का अधिकार रखने वाली होने के बावजूद भी सरकार कानों में तेल डाले हुए बैठी है। सरकार की इस कार्य शैली से प्रदेश का युवा वर्ग रोष में है इसलिए अब यह जरूरी हो गया कि सरकार को समय रहते इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर ठोस निर्णय लेने का श्रेय एवं प्रेय कार्य करना चाहिए।