शस्त्रों के साथ शास्त्रों का भी किया पूजन

शस्त्रों के साथ शास्त्रों का भी किया पूजन

शस्त्रों के साथ शास्त्रों का भी किया पूजन

पाली । सेविकाओं ने राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक वंदनीय मौसीजी लक्ष्मीबाई केलकर एवं लक्ष्म्य स्वरूपा वंदनीय सरस्वती ताई आप्टे तथा भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर शस्त्रों का पूजन किया। आयोजन पाली विभाग के सोजत सिटी, सोजत रोड, जैतारण, रायपुर, सुमेरपुर, सादड़ी, पिपलिया कला, राणी, गणावा, जैतारण और बाली सहित अनेक स्थानों पर किया गया।

विभाग कार्यवाहिका अंजना सर्राफ ने बताया कि सेविकाओं ने शाखाओं में शास्त्रों और शस्त्रों दोनों का पूजन किया। राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत इस अवसर पर राष्ट्रभक्ति के गीतों का गायन किया गया। 

प्रांत प्रचारिका ऋतु शर्मा ने अपने उद्बोधन में तपस्विनी, तेजस्विनी वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उनका जन्म 6 जुलाई 1905 को नागपुर में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन से राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दी और समाज सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया। राष्ट्रभक्ति के गुण उनमें माता-पिता के संस्कारों द्वारा विकसित हुए थे। मौसीजी के विचार थे कि प्रत्येक राष्ट्र जो अपनी उन्नति चाहता है, उसे अपनी संस्कृति और इतिहास को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि भूतकाल की घटनाएँ और कृतियाँ ही भविष्य के लिए प्रेरणास्रोत एवं पथप्रदर्शक होती हैं। मौसीजी लक्ष्मीबाई केलकर मात्र 27 वर्ष की आयु में ही विधवा हो गई थीं। उस समय उनके छह छोटे बच्चे थे, किंतु उन्होंने अपने जीवन को निराशा में डूबने नहीं दिया, बल्कि समाज और राष्ट्र सेवा को ही अपना जीवन उद्देश्य बना लिया। छः बच्चों और एक बाल विधवा ननद का दायित्व मौसीजी लक्ष्मीबाई केलकर पर था। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों से अत्यंत प्रभावित थीं, और चाहती थीं कि महिलाएँ भी इन विचारों से जुड़ें। इसी उद्देश्य से वे डॉक्टर हेडगेवार जी से मिलीं और महिलाओं के लिए शाखाओं के आयोजन की बात की। डॉ. हेडगेवार जी की प्रेरणा से राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना 25 अक्टूबर 1936 को वर्धा में हुई। आज राष्ट्र सेविका समिति विश्वव्यापी संगठन बन चुकी है और संघ के समानांतर स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही है।

उन्होने कहा कि उस समय जब महिलाएँ परंपरागत सीमाओं में बंधी थीं, तब घर से निकलकर शाखा में जाना एक क्रांतिकारी कदम था। राष्ट्र सेविका समिति राष्ट्र, परिवार और समाज के सर्वांगीण विकास की सोच रखती है। यह संगठन बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए निरंतर कार्य करता है। समिति सेविकाओं में स्वाभिमान, आत्मरक्षा का भाव, और समाज में आत्मसम्मानपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा जागृत करती है। उन्होंने कहा कि शस्त्र पूजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह हमारी शक्ति, आत्मविश्वास और राष्ट्ररक्षा की भावना का प्रतीक है। उन्होंने सेविकाओं से आह्वान किया कि वे समाज में राष्ट्रभक्ति, नारी शक्ति और संस्कारों के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएँ तथा समिति के माध्यम से अधिकाधिक महिलाओं को इस संगठन से जोड़ें।

संपर्क विभाग की सुमन पुरोहित ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज में समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर गंभीरता से कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण और नागरिक नियमों का पालन करना चाहिए, क्योंकि ये बातें समाज के आचरण में अमूल्य और सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली हैं। उन्होंने बताया कि “मंदिर, पानी और श्मशान” सभी हिंदुओं के एक होने के प्रतीक हैं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ मंगल संवाद करें और बैठें. यही सामाजिक एकता का मूल है। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए हमें “पानी बचाओ, प्लास्टिक हटाओ, पेड़ लगाओ” का संकल्प लेना चाहिए। स्वदेशी के अंतर्गत भाषा, भूषा, भ्रमण और भोजन सब कुछ हमारा होना चाहिए। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब अपनी मातृभाषा है तो हम अंग्रेज़ी क्यों बोलें? हमें अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए। साथ ही नागरिक नियमों का पालन करना भी प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। ये सभी बातें समाज को विकास की ओर ले जाती हैं। पाली विभाग में संपर्क अभियान सभी स्थानों पर सफलतापूर्वक आयोजित किए गए। समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने और संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समिति द्वारा पत्रकों का वितरण किया गया। इस अवसर पर प्रांत, विभाग और जिला की सभी अधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्यों का सहयोग रहा।

प्रांत कार्यवाहिका डॉ. सुमन रावलोत ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें सीता माता के आदर्शों को जीवन में अपनाते हुए शस्त्रों के साथ शास्त्रों का ज्ञान भी लेना चाहिए, ताकि हम धर्म, इतिहास, संस्कृति और अपने सांस्कृतिक मूल्यों को जान सकें। उन्होंने कहा कि सेविकाओं को आने वाली चुनौतियों, जैसे लव जिहाद जैसी घटनाओं से समाज को जागरूक करने के लिए शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से परिपक्व होकर समाज में कार्य करना होगा।

सुधा जोशी सोजत),लक्ष्मी जाट रोहट भाग्यश्री पिपलिया कला, नीतू जांगिड़,सोजत रोड तथा जिला कार्यवाहिका लक्ष्मी की सहभागिता इन सभी कार्यक्रमों में रही। कार्यक्रम में सेविकाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में शक्ति, समर्पण और सेवा के मार्ग पर अग्रसर रहेंगी।