330 लाख रुपए से बनेंगे छह एचएससी के नए भवन’
अब ग्रामीणों को घर के पास मिलेगा बेहतर इलाज’
’330 लाख रुपए से बनेंगे छह एचएससी के नए भवन’
पाली 27 अप्रैल। राजस्थान के ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और सुलभ बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने नए उप स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों के निर्माण के लिए 8030 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस राशि से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य में 146 स्वास्थ्य उप केंद्रों के नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अनुशंसा पर जारी इस राशि से सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव मादड़ी एंदलावास कानेलाव, खेतावास, वडेरवास व खरोकड़ा में नए स्वास्थ्य उप केंद्रों के नए भवनों का निर्माण किया जाएगा।
गोपालन डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के इन छह गांवों के एसएचसी (स्वास्थ्य उप केंद्र) के नए भवनों के लिए वित्तीय स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व चिकित्सा मंत्री गजेंद्रसिंह खींवसर का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एसएचसी के लिए 55 लाख रुपए की राशि मंजूर हुई है। कुमावत ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी को देखते हुए नए उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने और मौजूदा जर्जर भवनों को बदलकर नए आधुनिक भवन बनाने के लिए धनराशि जारी की है। इस परियोजना के तहत, चिन्हित किए गए स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से लैस भवन बनेंगे, जहां प्रसव कक्ष, टीकाकरण और सामान्य ओपीडी की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने कहा कि अब ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और टीकाकरण के लिए शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। नए भवन आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से युक्त होंगे जिससे कार्यक्षमता बढ़ेगी। उप स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा कर्मियों को कार्य करने के लिए बेहतर माहौल मिलेगा, जिससे वे सेवाएं अधिक समर्पण के साथ दे सकेंगे।
इन केंद्रों के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में अपग्रेड होने से गंभीर बीमारियों की शुरुआती चरण में पहचान और जांच आसान हो जाएगी। इन केंद्रों पर एएनएम और स्टाफ नर्स की उपस्थिति में 12 तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वहीं, विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। लंबे समय से मांग की जा रही थी कि छोटे-मोटे उपचार के लिए 20-30 किलोमीटर दूर न जाना पड़े। इस स्वीकृति से न केवल चिकित्सा सेवाएं मजबूत होंगी बल्कि दूर-दराज के गांवों में स्वास्थ्य का स्तर भी बेहतर होगा।
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