लोकतांत्रिक समाज में अधिकारो और कर्तव्यो के बीच सामंजस्य“

लोकतांत्रिक समाज में अधिकारो और कर्तव्यो के बीच सामंजस्य“

लोकतांत्रिक समाज में अधिकारो और कर्तव्यो के बीच सामंजस्य“

जोधपुर/राजस्थान उच्च न्यायालय मुख्य पीठ जोधपुर ने 77वें गंणतन्त्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमो की श्रंखला में गुरूवार को एक विशेष प्रेरणास्पद भव्य और विचारो तेजक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर न्यायालय परिसर में आयोजित विशेष ’परिचर्चा का विषय था “लोकतांत्रिक समाज में अधिकार और कर्तव्यों के बीच सामंजस्य’। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीया न्यायाधिपति महोदया डॉ नूपुर भाटी की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति संजीव प्रकाश शर्मा राजस्थान उच्च न्यायालय रहे।

इस परिचर्चा में राजस्थान उच्च न्यायालय की सभी आमंत्रित महिला अधिवक्ताओं में से 32 महिला अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया ओर लोकतंत्र की मजबूती के लिए अधिकार और कर्तव्यों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस परिचर्चा में शामिल महिला अधिवक्ताओं ने आधुनिक भारत के निर्माण में पर्यावरण संरक्षण, मतदान और सामाजिक समरसता जैसे कर्तव्यों को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया और राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुडे कर्तव्यों पर विशेष बल दिया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में न्यायाधिपति डॉ. नूपुर भाटी राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू है। केवल अधिकारों की मांग से समाज से असंतुलन उत्पन होता हैं जबकि कर्तव्यों का पालन लोकतंत्र को सदृढ बनाता है। उन्होने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान जहां हमे मौलिक अधिकार प्रदान करता है वही अनुच्छेद 51 के अंतर्गत मौलिक कर्तव्यों को भी रेखांकित करता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ’यदि अधिकार नदी हैं तो कर्तव्य उसके किनारे हैं बिना किनारों के नदी बेकाबू हो जाती है।“

कार्यक्रम के अगले चरण में उपस्थित न्यायाधिपति श्री योगेन्द्र कुमार पुरोहित ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान ने हमे स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का अधिकार दिया है लेकिन यह अधिकार राष्ट्रीय एकता और कर्तव्यों से जुड़े है। मौलिक अधिकार हमारी स्वतंत्रता की रक्षा करते है वही मौलिक कर्तव्य अनुशासन और जिम्मेदारी की याद दिलाते है।

परिचर्चा के दौरान न्यायाधिपति संजीत पुरोहित ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि अधिकार और कर्तव्यएक दूसरे के पूरक है लेकिन इनके बीच का टकराव तनाव पैदा करता है। हालांकि विरोध का अधिकार मौलिक है लेकिन इसका प्रयोग इस तरह से नहीं किया जा सकता जो अनिश्चित काल तक दूसरों के अधिकारों का उल्लघन करे।

इसी कार्यक्रम में न्यायाधिपति मुकेश राजपुरोहित एवम् माननीय न्यायाधिपति श्री कुलदीप माथुर ने अपने विचार रखते हुए इस बात पर बल दिया कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ ’फेक न्यूज’ और साइबर बुलिंग को रोकने की जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया जावे, साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों की सजगता और जिम्मेदारी पर निर्भर करती है। अधिकार तभी स्थायी रहेंगे जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। उन्होंने यह भी कहा किया कि मौलिक अधिकारों का वास्ततिक आनंद तभी मिलता है जब कर्तव्यों का पालन किया जाए।

माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति श्री संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा अपने उद्बोधन में सभी महिला अधिवक्ताओं को उत्साहवर्द्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन ना केवल अधिकारों और कर्तव्यों के बीच सामंजस्य एवं संतुलन के संबंध में एक नई सोच व समझ विकसित करते हैं। अपितु महिला अधिवक्ताओं को एक ऐसा मंच भी प्रदान करते है जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को ओर निखारते है।

कार्यक्रम के अंत में न्यायाधिपति डॉ नूपुर भाटी ने सभी उपस्थित माननीय न्यायाधिपतिगण बार एसोसिएशन के पदाधिकारीगण प्रतिभागीगण कार्यक्रम में उपस्थिति अधिवक्तागण व रजिस्ट्री सहित सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र तभी सशक्त होगा जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकार और कर्तव्य का संतुलन ही लोकतंत्र की असली शक्ति है।

समारोह में राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में पदस्थापित न्यायाधिपतिगण राजस्थान उच्च न्यायालय एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी एवं राजस्थान उच्च न्यायालय लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री दिलीप सिंह उदावत बार संघ से सम्मानित अधिवक्तागण बार काउंसिल के सम्मानित सदस्य रजिस्ट्री के अधिकारीगण एवं राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर के कर्मचारीगण सहित 400 प्रतिभागीयों ने शिरकत की।