भारतीय संस्कार व संस्कृति की साक्षात प्रतिमूर्ति थी राजमाता कृष्णा कुमारी साहिबा*
राजमाता की 100 वी जयंती 10 फरवरी 2026 पर सादर प्रकाशनार्थ आलेख -
*भारतीय संस्कार व संस्कृति की साक्षात प्रतिमूर्ति थी राजमाता कृष्णा कुमारी साहिबा*
जोधपुर राज परिवार की राजमाता कृष्णा कुमारी विलक्षण और अद्भुत व्यक्तित्व की धनी थी जिन्हें अपने जीवन में अनेक झंझावत से जूझना पड़ा हर सुख दुख में समभाव व तटस्थ भूमिका निभाते हुए उन्होंने कर्म करना ही अपना लक्ष्य बनाया । अपने जीवन के 92 वर्ष में ममतामयी मूरत राजमाता सा का 3 जुलाई 2018 को देवलोकगमन हो गया । जोधपुर राज परिवार व मारवाड़ के लोगों के लिए यह दिन अत्यंत दु:खदाई रहा । राजमाता कृष्णा कुमारी का जन्म 10 फरवरी 1926 को हुआ था । मंगलवार 10 फरवरी 2026 उनका 100 वीं जयंती है ।
*भारतीय संस्कार - संस्कृति की साक्षात प्रतिमूर्ति*
राजमाता कृष्णा कुमारी भारतीय संस्कार - संस्कृति की साक्षात प्रतिमूर्ति थी । एक स्नेहमयी मां -बहन, सफल गृहिणी सृजन -शक्ति की स्त्रोत अनुशासन प्रिय, धैर्यवान , सहनशील ,उदारमना, करुणामयी दानशीलता और अनेक भूमिकाओं को एक साथ निर्वाहक निर्वचननीया प्रेरक अभिनंदनीया, शक्ति स्वरूपा थी ।
*विशाल व गहरा व्यक्तित्व*
राजमाता का व्यक्तित्व विशाल व गहरा था । जन्मजात संस्कारों की आभा लिए हुए अद्भुत मानवीय गुणों से परिपूर्ण थी । मां के रूप में अद्वितीय पुत्री के रूप में निर्मल गंगाजल के समान संस्कारवान रही पत्नी के रूप में मर्यादाओं की सीमाओं में रहकर अपनी सर्वोच्च भूमिका निभाई,सास के साथ एक सेवाभावी बेटी बन कर रही । युवरानी के रूप में अपनी परिपूर्ण भूमिका में रही वहीं महारानी के रूप में ओजस्वी साम्राज्ञी के रूप में ओज से ओत प्रोत गौरव प्रतीत रही । सास की भूमिका को बेहतर तरीके से निभाया वही राजमाता की भूमिका में मारवाड़ की प्रजा के साथ अपनत्व वात्सल्य भाव से जन-जन की की आदरणीया व सम्माननीया बन गई । राजमाता भाग्यशाली महिला रही जिनको पड़पोत्र व पड़ पौत्री का लाड दुलार करने का अवसर व खुशी मिली ।
*ध्रांगध्रा की राजकुमारी बनी जोधपुर की युवरानी*
राजमाता कृष्णा कुमारी का जन्म 10 फरवरी 1926 को गुजरात के ध्रांगध्रा रियासत के महाराणा घनश्याम सिंह व महारानी आनंद कुंवर बा के यहा हुआ । 14 फरवरी 1943 को महाराजा हनवन्त सिंह के साथ विवाह हुआ ।इनके दो पुत्रिया चंद्रेश कुमारी व शैलेश कुमारी थी व 13 जनवरी 1948 को पुत्र युवराज गज सिंह का जन्म हुआ । गुजरात की होने के बावजूद भी आपने मारवाड़ की संस्कृति परंपराएं व रीति रिवाज के साथ इनका लालन पालन किया व संस्कार वान बनाया ।
*विकट समय को धैर्य पूर्वक संभाला*
राजमाता कृष्णा कुमारी के लिए पति महाराजा हनवन्त सिंह की 2 8 वर्ष की उम्र में 2 6 जनवरी 52 को हवाई दुर्घटना में निधन एक अत्यंत दु :खदाई व संकट की घड़ी थी । उस समय पुत्र युवराज गजसिंह मात्र 4 वर्ष के ही थे । आपने इन विकट परिस्थितियों को स्वीकार कर साहस व दृढ़ता के साथ संभाला । मात्र 4 वर्ष की उम्र में 12 मई 1952 को युवराज गज सिंह जी का महाराजा के रूप में राजतिलक हुआ व 8 वर्ष के पुत्र महाराजा गज सिंह को विदेश पढ़ने भेजा व राज परिवार को सुव्यवस्थित तरीके से संभाला व परिस्थितियों का मुकाबला सहजता से किया ।
*जोधपुर की नागरिकों ने मनाया 81 वां जन्मदिन*
जोधपुर राज परिवार व राजमाता के प्रति सम्मान का ही नतीजा था कि राजमाता का 81 व जन्मदिन जोधपुर के नागरिकों द्वारा 24 फरवरी 2007 को जन्म दिवस टाउन हॉल में गरिमापूर्ण व समारोह पर्व मनाया । उस समारोह की मुख्य अतिथि तत्कालीन राज्यपाल श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल थी । समारोह में सभी जाति धर्म एवं समाज के लोगों ने भागीदारी निभाई व जन्मोत्सव मनाया ।
*संसद में निर्दलीय सांसद के रूप में यादगार भूमिका*
1971 में राजमाता ने तत्कालीन परिस्थितियों में जनता की श्रद्धा व विश्वास के साथ मध्यवर्ती चुनाव में निर्दलीय रूप से लोकसभा का चुनाव लड़ा व जनता का अपार समर्थन मिला व विजयरही । सांसद बनने के बाद में राजमाता ने पूर्वाग्रह से रहित होकर जनता के लिए केंद्र तक हितकारी भावनाएं पहुंचाई व आम अवाम की सुख सुविधाओं को वरीयता दी । लोकसभा में लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई ।अपने संसदीय क्षेत्र के लोगो की भावनाओं को संसद के पटल पर रखा । क्षेत्र की समस्याओं को संसद में उठाया । संसदीय क्षेत्र के लोगों से संपर्क रखा । 6 वर्ष जनवरी 1971 से जनवरी 1977 तक सांसद रही । इस कार्यकाल में जोधपुर में विमान सेवा रेल सेवा का विकास,जोधपुर हाई कोर्ट के विभाजन का विरोध भारत पाक युद्ध के समय जवानों के परिवार व जनता के साथ रही रोजगार व अकाल पानी खाद्यान्न की समस्या के लिए समाधान के लिए लगातार मुखर रही पर्यटन विकास 2 अक्टूबर 1974 के छात्र आंदोलन का समाधान कर्मचारी आंदोलन सफाई कर्मचारी आंदोलन ,महंगाई विरोधी आंदोलन के समाधान जाट - राजपूत छात्र संघर्ष का समाधान जनता से लगातार जुड़ाव रखा ।
*राजमाता कहती थी " समै बदल्या संबंध नहीं बदलै "*
राजमाता यह हमेशा कहती थी की देश में प्रजातंत्र आ गया । "समै बदल्या संबंध नी बदलै " । जोधपुर राज परिवार का मारवाड़ -जोधपुर की जनता के साथ संबंध हमेशा अटूट व अपनायत वाला है । उनके द्वारा सभी समाजों व धर्मो को समान भाव से देखा जाता था । सभी का सम्मान किया जाता था । इसी कारण जोधपुर के राज परिवार के प्रति आज भी प्रजा का सम्मान बना हुआ है । गज सिंह भी उसी भाव को बनाए हुए हैं । उनका भी जनता में गहरा सम्मान है ।
*बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया*
राजमाता कृष्णा कुमारी द्वारा मारवाड़ में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिएविशेष में सार्थक प्रयास किया । जोधपुर में राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल,देसूरी में गर्ल्स हॉस्टल आदि इन प्रयासों में महत्वपूर्ण है । उनकी सोचती कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के बराबर अवसर दिए जाने चाहिए ।चौपासनी विद्यालय परिसर में उन्होंने महिला सम्मेलन भी आयोजित करवाया था ।महिलाओं को रोजगार के अवसर देने के भी अनेक प्रयास किए थे ।
*राजमाता पर अनेक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ*
राजमाता कृष्णा कुमारी परअनेक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ जिसमें मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के तत्कालीन महानिदेशक डॉ महेंद्र सिंह नगर ने "राजमाता कृष्णा कुमारी ममतामयी मूरत " अयोध्या प्रसाद गौड़ द्वारा " दी रॉयल ब्ल्यू " ,अंग्रेजी में " कृष्णा माई बिलवड सिस्टर " महाराजा श्री राज मेघराज बावा ध्रांगध्रा द्वारा लिखी गई व इसका प्रकाशन एच एच महाराजा हनवन्त सिंह जी चैरिटेबल ट्रस्ट जोधपुर द्वारा करवाया गया । इसके अलावा भी अनेक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है ।