बस गया हो ज़हन में जैसे कोई डर आजकल, सब इकट्ठा कर रहे हैं छत पे पत्थर आजकल" : दीपा परिहार 

बस गया हो ज़हन में जैसे कोई डर आजकल, सब इकट्ठा कर रहे हैं छत पे पत्थर आजकल" : दीपा परिहार 

बस गया हो ज़हन में जैसे कोई डर आजकल, सब इकट्ठा कर रहे हैं छत पे पत्थर आजकल" : दीपा परिहार 

संगीतमय काव्य गोष्ठी संपन्न   

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

जोधपुर। नवोदय सबरंग साहित्य परिषद, जोधपुर की द्विमासिक संगीतमय काव्य-गोष्ठी संस्था के इंकम टैक्स पावटा सी रोड स्थित सभाकक्ष में मेजबान श्रीमती अनुराथा व नरेन्द्र अडवानी की मेजबानी में संपन्न हुई।
   नशिस्त में कुल 15 रस-मर्मज्ञ उपस्थित थे। जयपुर से पधारे शैलेंद्र ढढ्ढा विशेष अतिथि थे।
शुभारंभ संयोजिका श्रीमती अनुराधा अडवानी ने स्मृतिशेष श्री एन.के.मेहता की तंजोमिज़ाज की बेहतरीन कविता- "सिक्का" की पुरअसर पंक्तियां-"चले जा रहे हैं, चले जा रहे हैं, हम किन रास्तों पे चले जा रहे हैं" से किया। तत्पश्चात ओमप्रकाश गोयल 'सायर' ने-"ये प्यार है सनम जी, बढ़ता है धीरे-धीरे', अब्दुल रहीम सांखला ने- 'ग़मों का शिकवा नहीं करते" तथा रजा मोहम्मद ने-"जिनको चाहा था पूजा था उनको" से किया।
   उसके बाद नए गजलकार रोशन अली 'कौसर' ने अपना कलाम-"नाम उल्फत क सभी लेते हैं" पेश किया। कार्यक्रम की एकमात्र कवयित्री डॉ.दीपा परिहार की ग़जल के अनूठे  शेर-'बस गया हो ज़हन में जैसे कोई डर आजकल, सब इकट्ठा कर रहे हैं छत पे पत्थर आजकल" को श्रोता देर तक गुनगुनाते रहे। दिलीप पुरोहित ने राज. कविता-"बागां रा मुरझाया फूल"सुनाई।
   अशफाक अहमद फौजदार ने-"दोस्तो वो भी मुकद्दर का सिकंदर है तो सही" सुनाकर वाहवाही लूटी। हंसराज बारासा'हंसा' ने "सादगी में ही जब शराफ़त का रंग हो" सुनाई। पत्रकार व कहानीकार मिश्रीलाल पंवार ने अपनी चर्चित कहानी-"नंदिनी" का पाठ कर उपस्थित समूह में त्याग और संवेदना का सैलाब भर दिया।
  जाने-माने गजलकार असरार 'आहिल' ने मीरा-भक्ति पर अपनी नवीनतम रचना के अंश-"जिसके शीशों में हर ओर है मोहन ही मोहन" सुनाकर सबको भक्तिमय कर दिया। अतिथि कवि शैलेन्द्र ढढ्ढा ने तीन रचनाएं सुनाई, उनकी पंक्ति "दीन है वो कवि, जो कविता को नए शब्द नहीं दे पाता" ने कवि- समुदाय को झकझोर दिया।
   श्याम गुप्ता 'शान्त' ने मनुष्य के अवमूल्यन की रचना-'फर्क' व विशुद्ध हास्य रचना-' ये फोनवा भी कैसे-कैसे' सुनाकर कक्ष में हास्य का संचार कर दिया। गायक असगर अली ने फिल्मी गीत-"कहां तक मन को छलेंगे ये अंधेरे" सुनाया। अंत में चिकित्सक व गायक डॉ. महेंद्र जैन ने प्रसिद्ध पार्श्वगायक तलत महमूद के गीत "जलते हैं जिसके लिए" तथा "तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी" परोसकर सबको भावविभोर कर दिया।
   ढाई घंटे तक चले इस शानदार कार्यक्रम का संचालन संस्था के सचिव अशफाक अहमद फौजदार ने किया। कार्यक्रम के अंत में संयोजिका व मेजबान श्रीमती अनुराथा अडवानी ने पधारे हुए सभी कवि,शायर, कलमकार एवं गायकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।