हज़रत मुहम्मद सल्ला की शिक्षाएं और हमारी जिम्मेदारियां पर निबन्ध प्रतियोगिता के आयोजन का समापन 

हज़रत मुहम्मद सल्ला की शिक्षाएं और हमारी जिम्मेदारियां पर निबन्ध प्रतियोगिता के आयोजन का समापन 

हज़रत मुहम्मद सल्ला की शिक्षाएं और हमारी जिम्मेदारियां पर निबन्ध प्रतियोगिता के आयोजन का समापन 

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

ब्यावर। जमाअते इस्लामी हिन्द, ज़िला -अजमेर,ब्यावर व राजसमंद की जानिब से ग्राम पंचायत सुहावा ब्यावर में निबन्ध प्रतियोगिता - "हज़रत मुहम्मद सल्ला की शिक्षाएं और हमारी जिम्मेदारियां" जिसमें बड़ी तादाद में बच्चे व बच्चियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत तिलावते कुरआन से हुई। इसके बाद मुमताज़ अली सहसचिव जमाअते इस्लामी हिन्द, ज़िला - अजमेर, ब्यावर व राजसमंद ने कहा कि अल्लाह तआला ने हज़रत मुहम्मद सल्ला को रहमतुल लिल्आलिमीन बनाकर भेजा है। हज़रत मुहम्मद सल्ला किसी जाति विशेष के नबी या रसूल नहीं हैं। उनका पैगाम पूरी मानव इंसानियत के लिए है। हज़रत मुहम्मद सल्ला ने इंसानों की ज़िन्दगी के हर मैदानों में रहनुमाई फ़रमाई है। पैदा होने से लेकर मौत तक। जैसे रहन- सहन, खान- पान, रिश्ते- नाते, लेन- देन, व्यापार, समाजिक सम्बन्ध और यहां तक कि शासन - प्रशासन व सियासत कैसे करनी है। और केवल बताया ही नहीं उन्होंने यह सब अपने जीवनकाल में करके दिखाया। सभी इंसानों को उनकी जीवनी को जरूर पढ़ना चाहिए। और प्यारे बच्चों हज़रत मुहम्मद सल्ला ने कहा कि तालीम का हासिल करना हर मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है। आप जानते हैं कि अगर फ़र्ज़ अदा नहीं करेंगे तो गुनहगार होंगे। तालीम के बैगर इंसान ऐसा ही है जैसे अन्धा इंसान। प्यारे बच्चों व बच्चियों अब हम सभी की जिम्मेदारी है कि उनके पैग़ाम को आम इंसानों तक पहुंचाएं।

इस मौके पर मेहबूब खान डायरेक्टर इक़रा पब्लिक स्कूल ने कहा कि तालीम ही हर मैदानों तरक्की दिला सकती है। और तालीम के साथ साथ नैतिक तालीम भी जरूरी है जब ही इंसान तालीम का सही मायने में हक़ अदा कर सकता है। मौलाना शमसुद्दीन काठात व आसिफ काठात ने भी इस मौके पर अपनी अपनी बातें रखीं। प्रथम, द्वितीय, तृतीय व सात बच्चे व बच्चियों को बतौर हौसला अफजाई कापी,पेन, पेंसिल, रबर, सोपनर, जोमक्टीरी बाक्स, पानी बोतल इत्यादि दिए गए। इस मौके पर धन्ना काठात, मुहम्मद हुसैन, रमज़ान काठात, मुबारक काठात,तालिब मंसूरी,हनीफ़ खान, कमरूद्दीन व अन्य लोग मौजूद थे। मौलाना मुहम्मद इरशाद की दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।