साहित्य संस्था काव्य- कलश की कलश काव्य गोष्ठी संपन्न
साहित्य संस्था काव्य- कलश की कलश काव्य गोष्ठी संपन्न
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
जोधपुर । साहित्य की सुगंध बिखेरती संस्था-"काव्य- कलश" के पावटा सी रोड स्थित सभाकक्ष में नगर के सवा दर्जन कलम के सिपाहियों ने राष्ट्र-भाषा, देश-प्रेम, पर्यावरण की शुद्धता एवं राजनीति पर हास्य-व्यंग्य के तीखे बाण छोड़े।गोष्ठी की सदारत एडवो.एन.डी.निंबावत ने की। ढाई घंटे तक साहित्यकार व श्रोता काव्य-रस में डूबते-उतराते रहे।
गोष्ठी का आगाज उभरती नवोदित कवयित्री ममता गहलोत ने अपनी राज.रचना- "वे म्हारे सूं प्रेम जतावे, वांरो माथो खराब है" से किया। कवि राजेश मोहता-"सब नाग ही हैं तेरे शहर में" सुनाकर सबको झकझोर दिया। हर्ष मीणा ने गज़ल-"करनी है सो करो आमने-सामने" सुनाई।
एडवोकेट एन.डी.निंबावत ने राज. रचना-"कांई सोचे खड़ी-खड़ी तू बाजरा रे खेत में" तो ओमप्रकाश गोयल 'सायर' ने-"इज्ज़त-शोहरत- रुतबा नाम था हमारा" सुनाई।
हंसराज 'हंसा' ने गजल- "जीवन इसलिए नहीं मिला कि उसमें दर्द भरलो" तो पर्यावरणविद प्रदीप शर्मा ने- "मैं पेड़ लगाऊंगा" सुनाकर पर्यावरण को प्रदूषण-विहीन रखने का संदेश दिया। रजा मोहम्मद ने अपनी विशिष्ट शैली में गज़ल- "दर्द तो था मगर दवा न मिली" सुनाई। जुगल सारस्वत ने कविता "व्यथा" में पीड़ा कसमसाई- "संवेदनाएं शूल चुभाती हैं" सुनाई।
राज. व हिंदी के हस्ताक्षर डॉ.दीपा परिहार ने राजभाषा को समर्पित कविता- "हरेक भारतवासी शख्स की पहचान है हिंदी" तो डॉ. छगन राव ने- "पाई आदर से मैंने सबसे प्रीत" सुनाकर सभाकक्ष में प्रीत की रीत जगादी।
वरिष्ठ कवि श्याम गुप्ता 'शान्त' ने श्रृंगार की सुरीली कविता- "रुनक-झुनक-सी पायल तेरी" सुनाकर माहौल को रसमय बना दिया। कार्यक्रम संचालित कर रही एंकर नीलम व्यास 'स्वयंसिद्धा' ने सवैया छंद में राज. रचना में मरुभूमि का चित्ताकर्षक बखान किया। पत्रकार, भजन-गायक व कहानीकार मिश्रीलाल पंवार ने मीराबाई के भजन- "मैं जाण्यो नाही हरी से मिलन कैसे होय" सुनाकर माहौल में भक्ति-रस घोल दिया। कार्यक्रम का सुखद समापन कवयित्री शुचि गुप्ता ने कविता- "कोई शय सता रही है" से किया।
अंत में संस्था-सचिव श्याम गुप्ता 'शान्त' ने पधारे हुए सभी रचनाकारों का हार्दिक धन्यवाद प्रकट किया।