दीपावली स्नेह मिलन कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन

दीपावली स्नेह मिलन कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन

दीपावली स्नेह मिलन कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन

पाली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शहर के मंडिया रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार शाम दीपावली स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवक परिवारों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान संघ कार्य के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चल रहे शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृखंला के अंतर्गत व्यापक गृह संपर्क अभियान के कर पत्रक भारत माता का चित्र एवं पुस्तक का विमोचन किया गया।

विभाग संघचालक मा. सुरेशचंद्र माथुर ने बताया कि दीपावली स्नेह मिलन में स्वयंसेवक परिवारों ने बहुत ही उत्साह के साथ भाग लिया.कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया.कार्यक्रम में बच्चों एवं मातृशक्ति के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताएं आयोजित की गई जिसमें सभी उत्साह के साथ सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के दौरान व्यापक गृह संपर्क अभियान के लिए साहित्य जो घर-घर संघ द्वारा पहुंचाया जाएगा उसका विमोचन किया गया। 

उन्होंने बताया कि यह 16 दिवसीय अभियान एक से 16 नवम्बर तक चलेगा। पाली नगर को 30 बस्तियों में विभाजित किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत स्वयंसेवक बस्ती स्तर पर घर-घर जाकर समाज के सभी वर्गों से संपर्क करेंगे। शताब्दी वर्ष का यह गृह संपर्क अभियान केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचने और एकात्मता के भाव को सशक्त करने का प्रयास है। अभियान के दौरान प्रत्येक स्वयंसेवक अपने क्षेत्र के परिवारों से संवाद करेगा, पंच परिवर्तन जिसमें सामाजिक समरसता स्व का बोध पर्यावरण संरक्षण कुटूंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य के बारे में आग्रह किया जायेगा और संघ यात्रा के विषय रखेंगे। प्रत्येक परिवार को एक कर-पत्रक (ब्रॉशर) भारत माता का चित्र और एक स्टिकर दिया जाएगा। अभियान का उद्देश्य संघ के शताब्दी वर्ष पर समाज को जोड़ना राष्ट्रहित संस्कार और सेवा के कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा संगठन और समाज के बीच आत्मीय संबंध सुदृढ़ करना है। इस अवधि में स्वयंसेवक नागरिकों को संघ की 100 वर्ष की यात्रा गतिविधियों सेवा कार्यों एवं राष्ट्रनिर्माण में सहभागिता के विभिन्न माध्यमों की जानकारी भी देंगे।

इस अवसर पर सैकड़ो की संख्या में स्वयंसेवक परिवार जनों की उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि इसमें स्व का बोध- जन-जन में स्व का भाव हो। स्वदेशी उत्पाद पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास भारतीय ज्ञान परंपरा आदि पर गौरव हो। कुटुम्ब प्रबोधन- परिवार व्यवस्था में संवाद व आत्मीयता बढाना सनातन परपंरा अनुसार जीवन शैली को प्रोत्साहित करना सामाजिक समरसता- समाज में व्याप्त भेदभावों और असमानता को खत्म कर समरस संगठित व समर्थ समाज का मार्ग प्रशस्त करना। नागरिक शिष्टाचार- नागरिकों में राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व को लेकर जागृति लाना।पर्यावरण संरक्षण- प्रकृति से लोगों का जुड़ाव बढाना। प्रकृति से सामंजस्यपूर्ण जीवन को अपनाना शामिल हैं.