बाल विवाह की रोकथाम के लिए आवश्यक निर्देश जारी’
बाल विवाह की रोकथाम के लिए आवश्यक निर्देश जारी’
पाली 10 अप्रैल। आगामी अक्षय तृतीया (आखातीज) 19 अप्रैल तथा पीपल पूर्णिमा 01 मई के दौरान बाल विवाह की संभावनाओं को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट डॉ. रविन्द्र गोस्वामी द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 13(4) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिले के अधिकारियों व कार्मिकों को बाल विवाह रोकथाम के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी एवं जिला कलेक्टर डॉ रविन्द्र गोस्वामी द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्राम एवं तहसील स्तर पर पदस्थापित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी जैसे पटवारी भू-अभिलेख निरीक्षक ग्राम पंचायत सदस्य ग्राम सेवक बीट कांस्टेबल हेल्पर एएनएम जीएनएम आंगनवाड़ी केंद्रों की महिला समन्वयक तथा प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक सहित ग्राम में पदस्थापित प्रत्येक सरकारी कर्मचारी यदि किसी बाल विवाह की जानकारी प्राप्त करते हैं तो वे तत्काल संबंधित क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट को सूचना देने के लिए पाबंद रहेंगे।
आदेश में बताया कि कि विवाह के कार्ड छापने वाले सभी प्रिंटिंग प्रेस विवाह कार्ड छापते समय वर-वधू की आयु संबंधी प्रमाण-पत्र प्राप्त कर अपने पास सुरक्षित रखें अथवा उनकी जन्म तिथि कार्ड पर अंकित करवाना सुनिश्चित करें। इसी प्रकार प्रादेशिक परिवहन अधिकारी विवाह में उपयोग होने वाले वाहनों को परिवहन परमिट जारी करते समय यह सुनिश्चित करेंगे कि वाहन का उपयोग बाल विवाह के लिए नहीं किया जाएगा।
विवाह समारोह में कार्य करने वाले पंडित हलवाई बैंड मास्टर टेंट मालिक फोटोग्राफर प्रिंटिंग प्रेस आदि को अनुबंधित करते समय उनसे निर्धारित प्रपत्र में एक परिवचन (अंडरटेकिंग) प्राप्त कर अपने पास सुरक्षित रखना होगा। संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट विवाह आयोजन के दौरान इन एजेंसियों से प्राप्त परिवचनों का सत्यापन भी करेंगे। इन सभी सेवा प्रदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी भी बाल विवाह का आयोजन नहीं करवाएंगे तथा यदि ऐसी कोई जानकारी प्राप्त होती है तो तुरंत प्रशासन या संबंधित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी को सूचित करेंगे। ऐसा नहीं करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
जिला मजिस्ट्रेट ने निर्देश दिए हैं कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर आमजन को जागरूक किया जाए तथा बाल विवाह की सूचना मिलने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आदेश की अवहेलना करने पर अधिनियम की धारा 11 के तहत बाल विवाह को प्रोत्साहित करने या उसका आयोजन करवाने वालों के विरुद्ध सक्षम न्यायालय में कार्रवाई की जाएगी।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि राजस्थान पंचायतीराज नियम 2006 के अनुसार बाल विवाह को रोकना सरपंच एवं प्रशासक के कर्तव्यों में शामिल है। पंच, सरपंच या प्रशासक इन मामलों में जागरूक और संवेदनशील रहें तथा उन्हें सूचित किया जाए कि यदि वे लापरवाहीवश बाल विवाह रोकने में असफल रहते हैं तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 11 के तहत वे भी उत्तरदायी होंगे। इस संबंध में राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर के आदेश की प्रति पंच, सरपंच, प्रशासक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को भी परिसंचारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट कार्यालय के कक्ष संख्या 127 में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है जो आगामी आदेशों तक कार्यरत रहेगा। नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर 02932-225380 है। नियंत्रण कक्ष के प्रभारी अधिकारी संस्थापन अधिकारी बालचंद (मोबाइल नंबर 9829920466) होंगे। नियंत्रण कक्ष में कार्यरत कर्मचारी प्राप्त होने वाली सूचनाओं को रजिस्टर में दर्ज कर तुरंत संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट अथवा थानाधिकारी को कार्रवाई हेतु प्रेषित करेंगे तथा की गई कार्रवाई की सूचना भी पुनः रजिस्टर में दर्ज करेंगे।