यूं हसरतें तड़पती हैं मेरी तेरे बगैर, दफ्ना दिया हो जैसे किसी को मरे बगैर : असरार 'आहिल
नवोदय सबरंग साहित्य परिषद की काव्य-गोष्ठी संपन्न
यूं हसरतें तड़पती हैं मेरी तेरे बगैर, दफ्ना दिया हो जैसे किसी को मरे बगैर : असरार 'आहिल'
स्व मेहता के जन्म-दिन पर काव्य-गोष्ठी संपन्न
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
जोधपुर। नवोदय सबरंग साहित्य परिषद संस्था के संस्थापक अध्यक्ष स्व एन के मेहता के जन्म-दिवस को स्मृति-दिवस के रूप से मनाए जाने के उपलक्ष्य में इन्कम टैक्स कॉलोनी, पावटा कार्यालय में एक संगीतमय काव्य-गोष्ठी संपन्न हुई।
गोष्ठी में 15 साहित्यकारों-कलाकारों ने अपने फन से शब्द व सुर के आलाप से सजी महफिल को ढाई घंटे तक अपने आगोश में बांधे रखा। गोष्ठी का आगाज डॉ उमेश दाधीच ने श्री मेहता को श्रृद्धांजलि देते हुए- "पल-पल दिल के पास" गीत से किया। तत्पश्चात् जुगल किशोर सारस्वत (ये पीर बनी प्रियतमा) ओमप्रकाश गोयल 'सागर' (मुझको मालिक से डर लगता है) तथा रजा मोहम्मद ने गजल- 'चराग दिल में जलाकर' से समां बांध दिया।

हंसराज 'हंसा' व अब्दुल रहीम सांखला ने अपने शानदार कलाम पढे। अशफाक अहमद फौजदार ने गजल-' दुनिया वालो राहे इश्क में दुश्वारी क्या' तथा नीलम व्यास 'स्वयंसिद्धा' ने पिता पर रचना पढी। दीपिका 'रूहानी' ने एक गीत व एक कविता-' हर कदम पर कोई कातिल है', तो श्याम गुप्ता 'शान्त' ने कविता-' बर्फ बना बेबस बाप' पढ़ी। वरिष्ठ शायर असरार 'आहिल' ने शानदार गज़ल- 'यूं हसरतें तड़पती हैं,' सुनाकर महफिल को ऊंचाई बख्शी।
पंकज जांगीड़ 'बिंदास' ने तरन्नुम में गीत -' किसी की मुस्कुराहटों पे हो न्यौछावर' सुनाया। डीके पुरोहित ने कविता-' कटार का हो या अपमान का घाव गहरा होता है' सुनाई।
सबसे अंत में कर्नल सुरेश शर्मा ने अपने रकशिश अंदाज में संगीत की धुन पर कुछ नगमे बिखेरे। पत्रकार, साहित्यकार व भजन-गायक मिश्रीलाल पंवार कार्यक्रम में अंत तक उपस्थित रहे। हिमांशु लाहोटी ने बतौर फोटोग्राफर अपनी भूमिका निभाई।
उपाध्यक्ष श्याम गुप्ता 'शान्त' ने गोष्ठी का संचालन किया। संस्था के सचिव अशफाक अहमद फौजदार ने आगंतुकों का धन्यवाद तथा मेजबान अडवानी द॔पति ने शानदार आतिथ्यपूर्ण स्वागत किया।