प्रदेश की पहचान राजस्थानी को अब भी नहीं मिला द्वितीय राजभाषा का दर्जा
प्रदेश की पहचान राजस्थानी को अब भी नहीं मिला द्वितीय राजभाषा का दर्जा
संघर्ष समिति ने राज्यपाल से की हस्तक्षेप की मांग, मानसून सत्र में निर्णय कराने का किया आग्रह
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
डेह ,*नागौर, 18 जुलाई।* राजस्थान की सांस्कृतिक अस्मिता और करोड़ों लोगों की मातृभाषा मानी जाने वाली *राजस्थानी भाषा* को आज तक प्रदेश में द्वितीय राजभाषा का दर्जा नहीं मिल पाने का मुद्दा एक बार फिर मुखर हो गया है। अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति ने इस संबंध में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े को ज्ञापन भेजकर आगामी मानसून सत्र में राज्य सरकार से इस विषय पर सकारात्मक निर्णय कराने हेतु पहल करने का आग्रह किया है।
समिति के अंतरराष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्य संगठक *लक्ष्मणदान कविया* तथा संभागीय महामंत्री *पवन पहाड़िया* ने ज्ञापन में कहा कि राजस्थानी विश्व की समृद्ध भाषाओं में शुमार है तथा राजस्थान की लोक-संस्कृति, साहित्य, इतिहास और जनजीवन की प्रमुख संवाहक रही है। स्वतंत्रता से पूर्व अनेक रियासतों में राजकाज की भाषा के रूप में इसका उपयोग होता था और आज भी राजस्थानी में निरंतर साहित्य सृजन हो रहा है, जो इसकी जीवंतता का प्रमाण है।
ज्ञापन में कहा गया कि राजस्थानी का विशाल शब्द-भंडार, समृद्ध लोकसाहित्य, लोककथाएँ, लोकगाथाएँ और लोकगीत राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करते हैं। प्रदेश की इसी सांस्कृतिक धरोहर से प्रभावित होकर हर वर्ष बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक राजस्थान आते हैं।
संघर्ष समिति ने ध्यान दिलाया कि *25 अगस्त 2003* को राजस्थान विधानसभा ने सर्वसम्मति से राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बावजूद राज्य स्तर पर आज तक उसे द्वितीय राजभाषा का दर्जा नहीं दिया गया। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल ही में उच्चतम न्यायालय द्वारा मातृभाषा को शिक्षा से जोड़ने संबंधी दिए गए महत्वपूर्ण निर्देशों ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित किया है।
समिति का कहना है कि यदि राजस्थान सरकार राजस्थानी को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान करती है तो संविधान की आठवीं अनुसूची में उसके समावेशन की प्रक्रिया को भी नई गति मिलेगी। इसी उद्देश्य से राज्यपाल से आग्रह किया गया है कि वे इस विषय में सकारात्मक पहल करते हुए राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रेरित करें।
ज्ञापन में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े द्वारा भारतीय भाषाओं एवं मातृभाषाओं के संरक्षण के प्रति व्यक्त प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया गया है कि उनके हस्तक्षेप से राजस्थानी भाषा के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की दिशा में सार्थक पहल संभव हो सकेगी।
समिति ने आशा व्यक्त की है कि प्रदेशवासियों की लंबे समय से चली आ रही इस जनभावना का सम्मान करते हुए राज्य सरकार मानसून सत्र में राजस्थानी भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान करने की दिशा में ठोस निर्णय लेगी।