एकल खिड़की बनी चक्कर खिड़की             

एकल खिड़की बनी चक्कर खिड़की             

एकल खिड़की बनी चक्कर खिड़की                             जोधपुर / जिला कलेक्टर  कार्यालय परिसर में स्थित आमजन व जरूरतमंदो की मदद के लिए एकल खिड़की खोली। प्रशासन ने आमजन के कार्यों  को सरल व सीधा  करने के कार्य को सराहनीय बताया। आमजन को भी राहत मिलने के आश्वासन की ख़ुशी मिली। थोड़ा दिन ठीक ठाक काम चलता रहा अब यहीं खिड़की चक्कर लगवाने का केंद्र बनकर रह गईं।  चांदपोल निवासी  विधवा महिला पूजा राठी बताती हैं कि करीब दो माह से एकल खिड़की पर चक्कर लगा रही हूँ पर काम नहीं हो रहा ओर न कोई संतोषजनक जवाब मिला। वे कहती हैं  मैंरे बच्चे के लिए जाति एवं कार्ड बनाने एकल खिड़की पर गईं।  टोकन नम्बर 26854797553 जून को दिया तीन बार फाइल के एक एक कागजात के लिए चक्कर लगवाए कभी फोटो  मिस मैच, कभी कभी घर का मकान या गांव में जमीन के कागजात होना आवश्यक हैं।  जिंदगी में जमीन का होना जरूरी नहीं तो रहो Myself योजनाओं व लाभो से दूर। सरकार संवेदनशील हैं मगर पहरेदार का  अपने रूल्स बना देते हैं। जब पूजा प्रमाण पत्र लेने  तो फोटो मिसमेच का एतराज लगाया, फिर समाज से जाति प्रमाण लाने, कागजो को लाना में महीना भर चक्कर  कटवाए को अंत में कह दिया। मकान व जमीन के कागज लाकर कॉपी दो। नहीं तो नहीं बनेगा प्रमाण पत्र यह सुन वो सन्न रह गईं कि अगर सम्पति  नहीं तो एक विधवा  महिला ज़ो मजदूरी कर आपना एवं दो बच्चों का पालन पोषण कर रही। सरकार के नियमों में वास्तविक जरूरतमंद के लिए काफ़ी पेचदगी हैं। जब उनसे कारण पूछा प्रमाण पत्र नहीं बनेंने का तो बोले सरकारी नियम हैं बड़े साब के पास जाओ। वहां गए तो तहसीदार शहर गद्दी पर नहीं तो पूछे कहा तुरंत रटा रठाया जवाब आया -केम्प में गए। सरकार ने आमजन के कल्याण के शिविर में काम हुआ। दूसरी जगह अटका। अब बारी यह सोचने की हैं जरुरतमंद सरकारी सुविधाओं व जन कल्याणकारी का लाभ क्यों नहीं ले पा हैं। जब पूजा राठी इस झमेले से बाहर आकर आज शुक्रवार को दुखी मन से अपनी फाइल वापिस ले ली की बोलने में आसान हैं सरकार संवेदशील पर जमीन पर हकीकत  कुछ ओर हैं। अब जरुरतमंद ई मित्र के पास मजबूरन जाता हैं।