ग़ज़ल : हवा बड़ी ज़हरीली है
ग़ज़ल : हवा बड़ी ज़हरीली है
हवा बड़ी ज़हरीली है,
जीभ तलक भी नीली है।
साँस अगर लें दम घुटता,
हालत सबकी ढीली है।
दिन में रहता धुंंध-धुआं,
रात मगर चमकीली है।
जाना तो है उसके दर,
राह भले पथरीली है।
देखूं उसको होय नशा,
ऐसी आँख नशीली है।
फिसल न जाऊं डर लगता,
आगे धरती गीली है।
मन ही मन सोचे 'सूना'
कैसी ये तब्दीली है।
-प्रकाश 'सूना'
14-ए, ब्लॉक सी-4 ए, जनकपुरी, नयी दिल्ली -110058