"आख़िर जिम्मेदार कौन"
"आख़िर जिम्मेदार कौन"
घर - परिवार, टूट रहें हैं,
संगी - साथी, छूट रहें हैं।
फ़िर भी हम, मौन हैं ?
वाहवाहियां, लूट रहें हैं,
डाल आपसी, फूट रहें हैं
फ़िर भी हम, मौन हैं?
अपने कर्म, भूल रहें हैं,
शर्म - ह्या भी, भूल रहें हैं।
फ़िर भी हम, मौन हैं?
रिश्ते - नाते, भूल रहें हैं,
झूठे मद में, झूल रहें हैं,
फ़िर भी हम, मौन हैं ?
सभ्य समाज, बिखर रहा हैं,
सिर्फ़ चेहरा, निखर रहा हैं।
फिर भी हम, मौन हैं ?
वह ग़लत राह, चल रहा हैं,
मन में सबको, खल रहा हैं।
फिर भी हम, मौन हैं ?
सोसियल लड्डू, बांट रहें हैं,
हमें आपस में, छांट रहें हैं।
फ़िर भी हम, मौन हैं ?
पता हैं सबको, पर मौन हैं
घुटन हो रही, पर मौन है
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✍️मुकेश आर चौहान
राज.पुलिस पाली
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