पुस्तक “आचार्य भिक्षु समाधि स्थल – इतिहास एवं विरासत का लोकार्पण
तेरापंथ के ग्यारहवें आचार्य महाश्रमण ने गत शनिवार सिरियारी में पाली के इतिहासकार एवं लेखक विजय नाहर की नवीनतम पुस्तक “आचार्य भिक्षु समाधि स्थल – इतिहास एवं विरासत” का लोकार्पण किया। भारतीय इतिहास संकलन योजना मरुक्षेत्र द्वारा प्रकाशित इस ग्रंथ में सिरियारी भिक्षु समाधि की खोज से लेकर वर्तमान विकास तक के तथ्यों को संजोया गया है। आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में कहा कि भिक्षु समाधि के इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह पुस्तक श्रेष्ठ सिद्ध होगी। विजय नाहर जो 10 वर्षों तक भिक्षु समाधि स्थल के परामर्शक तथा मानव हितकारी संघ राणवास के निदेशक रहे हैं ने इस कार्य को तेरापंथ के इतिहास पर अपनी पाँचवीं पाली के इतिहास पर आठवीं और भारतीय इतिहास पर 41वीं पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया है। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य आचार्य भिक्षु समाधि स्थल के इतिहास विकास और उससे जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को सरल भाषा में समझाना है; इसमें आचार्य भिक्षु के जीवन एवं योगदान का संक्षिप्त परिचय, सिरियारी के हेमराज मुनि की भूमिका संस्थापक व्यवस्थापक नाहरमल बाणगोता के योगदान तथा स्वर्गीय काकासाहब केसरीमलजी सुराणा के धम्मजागरण कार्य पर विशेष अध्याय शामिल हैं। यह पुस्तक केवल ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं बल्कि उन सभी व्यक्तियों की मेहनत, श्रद्धा और योगदान का प्रमाण है जिन्होंने सिरियारी को तेरापंथ का महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र बनाने में अपना अहम योगदान दिया है।